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UK: कोई भी संस्थान लंबे समय तक नहीं चल पाया बार्न्सडेल भवन में, सत्ता और शक्ति का केंद्र रहा यह इमारत

Thu, 16 Jul 2026 12:30 PM IST
Heera गिरीश रंजन तिवारी

सार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नैनीताल से हाईकोर्ट के स्थानांतरण की बहस तेज हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि 126 साल पुरानी यह ब्रिटिशकालीन इमारत सत्ता का केंद्र तो रही, लेकिन अब तक यहां स्थापित अधिकतर विभाग या तो बंद हो गए या अन्यत्र शिफ्ट हो गए। 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के निर्देश के बाद नैनीताल से हाईकोर्ट के शिफ्ट होने की चर्चा फिर से जोर पकड़ गई है। यह एक संयोग ही है कि जिस भवन में यह कोर्ट स्थित है वह ब्रिटिशकाल से ही सत्ता और शक्ति का केंद्र रहा लेकिन कोई भी संस्थान इसमें लंबे समय तक टिक नहीं पाया। इसमें स्थापित ज्यादातर विभाग या तो बंद हो गए या अन्यत्र स्थानांतरित कर दिए गए जबकि यह भवन निर्माण के 126 वर्ष बाद भी और एक बार आग लगने से बुरी तरह नष्ट होने पर पुनः निर्माण के बावजूद आज भी शानदार हालत में है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 9 नवंबर 2000 को नैनीताल में देश का 18वां उच्च न्यायालय बना।

विशिष्ट शैली में बना था यह ऐतिहासिक भवन

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उच्च न्यायालय का भवन वर्ष 1900 में बना था। इस भूकंपरोधी इमारत को उस दौर में प्रचलित गॉथिक शैली में बनाया गया था जिसकी विशेषता चौड़ी सीढ़ियां, रंगीन कांच की खिड़कियां, ऊंची मीनारें और आसपास की पृष्ठभूमि से मेल खाता भवन होता था। यह इमारत मूल रूप से बार्न्सडेल एस्टेट कहलाती थी लेकिन बाद में इसमें सचिवालय की स्थापना हुई तो इसे पुराने सचिवालय के रूप में जाना जाने लगा। यह भवन विकास भवन के रूप में इस्तेमाल हुआ जिसमें कुमाऊं मंडल विकास निगम, प्राधिकरण जिला विकास अधिकारी सहित अनेक कार्यालय चले।

 

 

पांच जजों से शुरु हुआ हाईकोर्ट
वर्ष 2000 में इस इमारत को मूल रूप से पांच कोर्ट रूम के साथ डिजाइन किया गया था। 2007 में एक बड़ा मुख्य न्यायाधीश न्यायालय ब्लॉक और वकीलों के चैंबर का ब्लॉक बनाया गया। हाईकोर्ट बनने के समय जजों की संख्या सात निर्धारित थी जो अब 11 कर दी गई है। जस्टिस अशोक ए देसाई इस हाईकोर्ट के संस्थापक मुख्य न्यायाधीश थे। जस्टिस रितु बाहरी इस हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं।

जेटली ने की थी नैनीताल में हाई कोर्ट बनाने की घोषणा

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उत्तराखंड राज्य स्थापना पर देहरादून के प्रदेश की राजधानी बनने के बाद राज्य में हाईकोर्ट की स्थापना की बात शुरू हुई। तत्कालीन कानून मंत्री अरुण जेटली का नैनीताल से पुराना और घनिष्ठ संबंध रहा था। नैनीताल आकर जेटली ने ही हाईकोर्ट नैनीताल में ही बनाने की घोषणा की थी। उस समय जेटली ने बचपन से ही नैनीताल के प्रति लगाव का जिक्र भी किया था। उन्होंने बताया था कि उनके कॉलेज के मित्र आईएएस अधिकारी विजय भूषण का घर नैनीताल में था जहां वे आया करते थे।
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