सुशीला तिवारी अस्पताल में दवाओं का जबरदस्त संकट है। शासन से भुगतान के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा है। उधार पर अस्पताल को दवाएं दे रही दवा कंपनियां नोटिस दे चुकी हैं और अब आंखें दिखा रही हैं।
दवा का बकाया अदा करने के लिए जरूरत दो करोड़ रुपये की है और मिले महज 19 लाख रुपये हैं। जबकि डीजल का बकाया चुकाने के लिए एक भी पैसा नहीं मिला है।
दवा कंपनियों ने एसटीएच को बिना पिछला भुगतान किए दवा देने से मना कर दिया था। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य और एसटीएच के एमएस के आग्रह पर कंपनियों दवाएं देती रहीं।
प्राचार्य ने मार्च अंत या अप्रैल में भुगतान का वादा किया था मगर भुगतान नहीं हो सका। दवा कंपनियों ने भुगतान को लेकर नोटिस भी भेजा था। कंपनियों का पिछले वर्ष से बकाया चल रहा है।
दवा कंपनियों का लगभग दो करोड़ रुपये का बकाया है। दूसरी ओर पेट्रोल पंप का भी लगभग आठ से दस लाख रुपये का बकाया हो गया है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि लगभग एक करोड़ रुपये शासन से स्वीकृत हुए हैं। इसमें दवा के लिए लगभग 19 लाख रुपये मिले हैं, जबकि डीजल का बकाया चुकाने के लिए एक भी पैसा नहीं मिला है।