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खगोल भौतिकी में और अधिक काम की जरूरत

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एरीज मे आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेते वैज्ञानिक - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। भारत इस समय खगोल भौतिकी के क्षेत्र में बहुत अच्छी स्थिति में है। आने वाले समय में युवा पीढ़ी को इस दिशा में और अधिक काम करना होगा। यह बात आर्यभट्ट प्रेक्षण एवं शोध संस्थान (एरीज) गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. पीसी अग्रवाल ने खगोल भौतिकीय (एस्ट्रोफिजिकल) जेट्स एवं प्रेक्षण सुविधाएं विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। सोमवार से शुरू हुई संगोष्ठी का शुभारंभ एरीज के निदेशक डॉ. दीपंकर बनर्जी ने किया।
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एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशि भूषण पांडेय के उद्घाटन भाषण दिया। इस मौके पर प्रो. पीसी अग्रवाल ने एस्ट्रोसेट, जीएमआईटी और 3.6 मी डॉट जैसे बहुतरंगदैर्घ्यीय परियोजनाओं के और अधिक दोहन पर जोर दिया। वरिष्ठ खगोलशास्त्री प्रो. अजित ने आने वाले समय में डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग एवं आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के महत्व पर रोशनी डाली। प्रो. के भावी ने कहा कि आने वाले समय में उन्नत तकनीकों से खगोलशास्त्र में नई खोजें संभव हैं।
कार्यशाला के पहले दिन प्रथम सत्र की शुरुआत में प्रो. केपी सिंह ने एम 82 और एम 87 नामक मंदाकिनियों का उदाहरण लेते हुए बहुतरंगदैर्घ्य एस्ट्रोसेट से लिए गए प्रेक्षण और उसके परिणामों के बारे में भी बताया। आईआईटी इंदौर के प्रो. अमित शुक्ला ने ब्लेजर जेट्स और उनके परिणामों पर चर्चा की। टीआईएफआर पुणे के डॉ. लंकेश्वर डे ने अत्यधिक द्रव्यमानित ब्लैक होल की पुष्टि, आयुका के जीसी देवांगन ने एस्ट्रोसेट से एजीएन का अध्ययन, तेजपुर विवि के रूपज्योति गोगोई ने मंदाकिनियों में जेट के उद्भव और आकृति के संकेत और आयुका के जाहिर साह ने तारों की चमक का एस्ट्रोसेट से प्रेक्षण पर व्याख्यान दिया। सत्र संचालन एरीज के वैज्ञानिक डॉ. सुवेंदु रक्षित ने किया। कार्यशाला का संचालन टीआईएफआर के प्रो. गोपकुमार ने किया।
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द्वितीय सत्र की शुरुआत में डॉ. पंकज कुशवाह ने ओजे 287 नामक एजीन पर कार्यों का उल्लेख किया। एरीज के वैदेही एस पलिया, विनीत ओझा, जामिया मिलिया इस्लामिया के मैन पाल, तेजपुर विवि के प्राणजुप्रिया, सुवेंदु रक्षित, एनसीआरए के सुमोना नंदी ने भी अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिए। कार्यशाला नौ अप्रैल तक चलेगी। इसके लिए एक हजार से अधिक वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने शोधपत्र भेजे हैं।
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