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असंतुष्टों के सहारे नैय्या पार करने की जद्दोजहद

Sat, 11 Feb 2017 01:18 AM IST
गिरीश रंजन तिवारी
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राजनी‌ति - फोटो : demo pic
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नैनीताल विधानसभा सीट पर भाजपा के संजीव आर्य, कांग्रेस की सरिता आर्या और भाजपा के बागी हेम आर्या ने ताकत झोंक दी है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही तीनों प्रत्याशियों के मतदाता अलग-अलग समूह में बंटे साफ नजर आने लगे हैं।
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भाजपा के प्रचार की कमान मुख्यत: महिला मोर्चा के हाथ में है। कांग्रेस को व्यापार मंडल और कर्मचारियों से ज्यादा आस है जबकि हेम आर्या की ताकत भाजपा और कांग्रेस का असंतुष्ट खेमा और न्यूट्रल मतदाताओं की सहानुभूति है।

नैनीताल सीट पर संजीव आर्य के प्रचार में सैकड़ों महिलाएं जुटी हैं। उन्हें हाल में नैनीताल में पहले की अपेक्षा बढ़त मिलती नजर आ रही है। भाजपा के प्रचार में प्रतिदिन महिलाओं की 40 टोलियां रवाना होती हैं जिसमें 17 तल्लीताल और 23 मल्लीताल क्षेत्र में घर-घर संपर्क कर रही हैं।
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इन घरों से जुटाए गए मोबाइल नंबरों पर पार्टी की ओर से मैसेज भेजने की भी व्यवस्था की गई है। ताकि इन वोटरों से लगातार संपर्क बना रहे। युवा और नौजवान भाजपाई संजीव के साथ पूरी ताकत से लगे हैं, लेकिन भाजपा के प्रचार में वरिष्ठ भाजपाइयों की भूमिका बेहद कम नजर आ रही है, जो भाजपा के लिए चिंता का सबब बन रहा है। संजीव के पक्ष में महिला मोर्चा के विशाल जुलूस से उन्हें राहत मिली है। नैनीताल में भाजपा महिला मोर्चा शुरू से ही खासा मजबूत रहा है।

कांग्रेस प्रत्याशी सरिता आर्या के पक्ष में तल्लीताल और मल्लीताल व्यापार मंडल एकजुट हैं। दोनों व्यापार मंडलों के अध्यक्ष सरिता का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। इसका सरिता को बड़ा लाभ मिला है।

इसके अलावा इस माह प्रदेश को कार्मिकों को पहली बार सातवें वेतन आयोग का बढ़ा हुआ वेतन मिला, जिससे सरकारी कर्मियों से भी सरिता को खासी उम्मीद है। विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मी परंपरागत रूप से उक्रांद के समर्थक रहे हैं और इस बार उक्रांद का प्रत्याशी नैनीताल से चुनाव में नहीं है।

अत: उनका रूझान भी सरिता की ओर हो सकता है, लेकिन हाल में विभिन्न पालिका सदस्यों के कांग्रेस छोड़ने से उन्हें नुकसान हुआ है। इन सभासदों ने भाजपा में शामिल होकर संजीव आर्य को मजबूती दी है।

भाजपा से बागी हुए हेम आर्या की सबसे बड़ी ताकत उनके प्रति विभिन्न वर्गो में सहानुभूति है। भाजपा और कांग्रेस के असंतुष्ट भी अंदरखाने हेम को सपोर्ट कर रहे हैं।

भाजपा के टिकट पर पिछला चुनाव मामूली अंतर से हार चुके हेम ने बीते पांच वर्षों में लगातार जनसंपर्क जारी रखा और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखी जिसका लाभ उन्हें मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर पहुंच रखने वाले हेम का व्यक्तिगत संपर्क मजबूत है,

लेकिन इस बार पार्टी का टिकट न मिलने से संगठन और कार्यकर्ताओं की कमी, पार्टी फंड से पैसा न मिलना, पार्टी नेटवर्क और कैडर वोट की कमी से उन्हें जूझना पड़ रहा है, जो एक बड़ी कमी के रूप में सामने आ रहा है।
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