डिमांड न आने से मुर्गे के व्यापारी परेशान हैं। मुर्गों का बाजार ठंडा है और फिलहाल 1500 मुर्गे ही रोजाना बिक पा रहे हैं, जबकि, चुनावी सीजन में यह संख्या 2500 से अधिक होने की उम्मीद इस कारोबार से जुडे़ लोगों को थी।
हल्द्वानी में लगभग 80 दुकानों पर मुर्गा बेचा जाता है। इसमें भी मंगलपड़ाव में मुर्गे की शॉप का सबसे बड़ा मार्केट है। शुक्रवार को कई दुकानदारों से बातचीत की गई तो सभी मुर्गा विक्रेता मुर्गे का बाजार ठंडा होने से परेशान दिखे।
आरके चिकन कॉर्नर के संचालक रियासत हुसैन कहते हैं कि चुनाव चलने की बात छोड़ो ठंडक के मौसम में वैसे ही मुर्गे की इतनी डिमांड होती थी कि दिन भर फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन आजकल बाजार ही ठंडा है।
यही नहीं 200 रुपए किलो से दाम घटकर 160 रुपए आ गए हैं। बताया कि फिलहाल मंगलपड़ाव बाजार में 300 से 350 मुर्गे ही रोजाना बिक पा रहे हैं। इसके अलावा शहर से दूर दराज वाले हल्द्वानी के अन्य क्षेत्रों में मुर्गे की दुकानों पर 300 से 350 मुर्गे निकल रहे हैं।
पर ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गे का रेट बाजार से अधिक यानी कि 180 रुपए किलो चल रहा है। वहीं, नैनीताल रोड और बरेली रोड पर चिकन कार्नर के नाम से दर्जन भर दुकानें चल रही हैं, उनका धंधा भी ठंडा ही है। लामाचौड़ में पोल्ट्री फार्म चलाने वाले दीप सरकार भी मुर्गे की डिमांड न बढ़ने को लेकर परेशान हैं।
शराब दे रहें हैं, अब दाल से खाओ या चिकन से
निर्वाचन आयोग की पैनी नजर होने के कारण कुछ प्रत्याशी समर्थकों को मुर्गे की दावत देने से बच रहे हैं। चर्चा है कि कुछ प्रत्याशी कार्यकर्ताओं को थकान उतारने के लिए केवल शराब की व्यवस्था करके दे रहे हैं। अब इस शराब को कार्यकर्ता खुद मुर्गा खरीदकर उसके साथ पिए या सब्जी के साथ, यह उसकी टेंशन है।