वरिष्ठ नाट्य निर्देशक प्रेम मटियानी भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन जीते जी नैनीताल से उनका गहरा रिश्ता रहा। नैनीताल के प्रति उनका लगाव इस बात से ही जाहिर हो जाता है कि अति व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने युगमंच के होली महोत्सव से लेकर यहां आयोजित होने वाले शरदोत्सव में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
इतना ही नहीं उन्होंने कई बार यहां आयोजित होने वाली नाट्य कार्यशालाओं में बतौर प्रशिक्षक हिस्सा लेकर नौजवानों को रंगमंच के गुर भी सिखाए। उनके निधन से सरोवर नगरी के रंगकर्मी और साहित्यकार स्तब्ध है।
मूल रूप से अल्मोड़ा के बाड़ेछीन गांव में जन्में प्रेम मटियानी की शिक्षा दीक्षा अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में हुई। गीत एवं नाटक प्रभाग के निदेशक के पद पर रहते हुए भी उन्होंने कई बार सरोवर नगरी में आयोजित नाट्य कार्यशालाओं में हिस्सा लिया।
प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही बताते हैं कि वर्ष 1980 के दशक में प्रेम मटियानी ने गीत एवं नाटक प्रभाग के सहयोग से मल्लीताल स्थित फ्लैट्स में आजादी पर लगभग डेढ़ घंटे की नाट्य प्रस्तुति दी जिसे आज भी लोग बखूबी याद करते हैं। उन्होंने बताया कि जब वह इलाहाबाद में पढ़ाई करते थे तब प्रेम अपने बड़े भाई शैलेश मटियानी के साथ इलाहाबाद में ही रहते थे।
तभी से वह रंगकर्म में रचे बसे थे। प्रसिद्ध नाट्य संस्था युगमंच के संस्थापक जहूर आलम बताते हैं कि वर्ष 1983 में प्रेम मटियानी युगमंच की नाट्य कार्यशाला में एक्सपर्ट के रूप में आए थे।
लगभग बीस साल पहले जब युगमंच ने नैनीताल में होली महोत्सव की शुरूआत की तो प्रेम मटियानी बेहद खुश हुए और उन्होंने युगमंच के प्रयास की जमकर सराहना की। इसके बाद कई बार वह होली महोत्सव में शामिल हुए।
गीत एवं नाटक प्रभाग के सहायक निदेशक डॉ. संतोष आशीष बताती हैं कि नाट्य निर्देशक प्रेम मटियानी ने गीत एवं नाटक प्रभाग के सहयोग से वर्ष 2000 और 2001 में नैनीताल में शरदोत्सव के लाइट एंड साउंड के माध्यम से धरोहर और मंजिलें और भी हैं नाटक प्रस्तुत किए थे।
वह बताते हैं कि इन दोनों नाटकों में विभागीय कलाकारों के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय रंगकर्मियों ने हिस्सा लिया था। नैनीताल आर्ट्स के अध्यक्ष रितेश कुमार बताते हैं कि वर्ष 2011 में उन्होंने शैले हॉल में हिंदी नाटक तुगलक का मंचन कराया।
जिसमें प्रेम मटियानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उनके निधन से सरोवर नगरी के रंगकर्मी स्तब्ध हैं।
चार दिन पहले नैनीताल में थे प्रेम मटियानी
प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक प्रेम मटियानी चार दिन पहले सरोवर नगरी में ही मौजूद थे। वह यहां एक होटल में ठहरे थे। गीत एवं नाट्य प्रभाग की सहायक निदेशक डॉ. संतोष आशीष ने बताया कि प्रेम जी बीते 9 व 10 सितंबर को यहां प्लैटिज होटल में ठहरे थे।
11 सितंबर को वह नैनीताल से दिल्ली को रवाना हो गए। डॉ. आशीष ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद 12 सितंबर को उन्होंने परिजनों से दांत में दर्द की शिकायत की और दवा ली। दवा खाने के बाद उनकी तबियत और बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें दिल्ली से निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।