रिश्तों की यह अजीब डोर है। वक्त गुजरने के साथ इसकी एक गांठ तो खुल चुकी है, मगर दूसरी डोर न जाने कितना वक्त ले, यह वक्त के ही हाथ है। कहानी दो बच्चों और उनके ऐसे मां-बाप की है जो आज से 20 साल पहले एक दूसरे से अलग हो गए। तय हुआ कि बच्चे पिता के साथ रहेंगे। वक्त निकलता गया और बच्चे भी बड़े होते गए। इधर उम्र बढ़ने के साथ बच्चों के माता-पिता जीवन की परेशानियों के बीच एक दूसरे के करीब आए, मगर पिता के साथ रह रहे बच्चों से मां अब तक बहुत दूर जा चुकी थी। अब जब बच्चों के माता-पिता ने तय किया वह साथ रहना चाहते हैं तो बच्चों ने साफ कह दिया कि उन्हें पिता का दुलार तो चाहिए मगर मां का साया भी नहीं...।
अल्मोड़ा जिले के एक व्यक्ति की शादी करीब 25 वर्ष पहले हुई थी। इस बीच दंपती को बेटा और बेटी हुए। शादी के करीब पांच साल बाद पति को पत्नी के चरित्र पर शक होने लगा। बात-बात पर तानों से तंग आकर पत्नी अपने मायके चली गई। विवाद इतना बढ़ा कि पत्नी ने केस दाखिल कर दिया। करीब 20 वर्षों तक दोनों में अलगाव रहा। पत्नी-पत्नी उम्र का 40 का पड़ाव पार कर चुके हैं। दोनों ने तय किया कि वह बीती बातों को भुलाते हुए अब साथ रहेंगे। अब दंपति के स्नातक कर रहे बेटा-बेटी मां को अपने साथ रखने के लिए तैयार नहीं हैं। इतना नहीं वह मां को अपने आसपास भी कहीं नहीं रहने देना चाहते हैं।
विधिक सेवा प्राधिकरण पहुंचा मामला
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा तो यहां से दंपती को काउंसलिंग के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के काउंसलिंग सेंटर भेज दिया गया। मनोचिकित्सक राखी माधवा के अनुसार दो बार काउंसलिंग में पत्नी-पत्नी साथ रहने के लिए राजी हो गए हैं, लेकिन अब बच्चे उनके रिश्ते में बाधा बन गए हैं। बच्चों का कहना है कि वे पिता के साथ तो रह लेंगे, लेकिन मां को साथ नहीं रखेंगे। इतना ही नहीं बच्चे यह भी नहीं चाहते कि उनकी मां उनके आसपास भी कहीं रहे। काउंसलिंग में पता चला कि दोनों बच्चे स्नातक कर रहे हैं और बालिग भी हैं।
मामला काउंसलिंग सेंटर भेजा गया है। यहां पति-पत्नी की काउंसलिंग की जा रही है। प्रयास है कि दंपती के रिश्ते फिर से जुड़ जाएं। -प्रदीप मणि त्रिपाठी, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण