नैनीताल। सैलानियों के अलावा प्रवासी पक्षियों को भी नैनीताल का मौसम खूब भाता है। यही वजह है कि अक्तूबर की गुलाबी ठंड शुरू होते ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों से अलग अलग प्रजातियों के पक्षी प्रवास के लिए नैनीताल पहुंचते हैं। इन दिनों टफ्टेड बतख का झुंड नैनीझील की खूबसूरती बढ़ा रहा है। टफ्टेड बतख पर्यटकों के साथ वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक टफ्टेड बतख अक्तूबर से उत्तरी यूरेशिया से भारत का रुख करते हैं। इसके बाद यहां पहुंचकर झील, तटबंध और नदियों के आसपास डेरा जमा लेते हैं। टफ्टेड डक इन दिनों नैनीझील में अठखेलियां करतीं या आकाश में उड़ती नजर आ रही है। नैनीझील में यह बतख इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। झील किनारे अलग-अलग स्थानों पर बने सेल्फी प्वाइंट से सैलानी इन्हें निहार रहे हैं। वन्य जीव विशेषज्ञ केएस सजवाण ने बताया कि टफ्टेड बत्तख ठंड बढ़ने पर हिमालय की तहलटी की ओर आ जाते हैं और गर्म मौसम में लौट जाते हैं। उन्होंने बताया कि टफ्टेड बतख अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर के अलावा मार्च अप्रैल में भी दिखाई देती है। सर्दियों में यहां पोचार्ड, यूरेशियन कूट, जलकाक और कॉमन कूट भी प्रवास पर पहुंचते हैं।
टफ्टेड बतख झुंड में आती है नजर
नैनीताल। वन विभाग के बाॅटनिकल गार्डन के वन बीट अधिकारी और पक्षी प्रेमी अरविंद कुमार ने बताया कि टफ्टेड बतख उत्तरी यूरेशिया का पक्षी है जो शीतकाल में भारत के कई राज्यों में दिखाई देता है। इनमें व्यस्क नर काले रंग का होता है और उसमें सफेद धब्बे होते हैं जबकि व्यस्क मादा भूरे रंग की होती है। उसका भूरा रंग पीलापन लिए होता है। यह झील और नदियों में पांच से सात मीटर तक का गोता लगाती है। यह पक्षी मुख्य रूप से गोता लगाकर कीड़े और सतह में मौजूद पौधों का भोजन करते हैं। इनकी लंबाई 40 से 45 सेंटीमीटर और वजन लगभग पांच सौ ग्राम से सात सौ ग्राम तक होता है। इन्हें गुच्छेदार बतख भी कहा जाता है। यह हमेशा 20 से 30 के झुंड में दिखाई देती हैं।
ठंड शुरू होने के साथ ही प्रवासी पक्षियों के आने का समय हो गया है। प्रवासी पक्षियों को नैनीताल की वादियां खूब पसंद आती हैं। विभाग की ओर से प्रवासी पक्षियों की आवाजाही पर नजर रखी जाती है।
-नितिन पंत, वन क्षेत्राधिकारी, नैनीताल