नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के भाई कुलदीप सिंह बिष्ट की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कुलदीप सिंह बिष्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि गिरधर सिंह बिष्ट चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर थे। उन्होंने उत्तराखंड सरकारी सेवक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 3(डी) के तहत गंभीर बीमारी के आधार पर स्थानांतरण से राहत के लिए हाईकोर्ट में चिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को राज्य सरकार और डीजी मेडिकल हेल्थ को निर्देश दिया था कि गिरधर सिंह के उपस्थित होने के दो दिन के भीतर उनकी दोबारा मेडिकल जांच कर रिपोर्ट/प्रमाणपत्र जारी किया जाए।
याचिका में आरोप था कि गिरधर सिंह 28 फरवरी 2026 को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए, लेकिन उन्हें कोई प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बावजूद 5 मई 2026 को उनका दोबारा स्थानांतरण कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस प्रकार हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। याचिका में कहा कि बाद में गिरधर सिंह कोमा में चले गए और उनकी मृत्यु हो गई। उनके भाई कुलदीप सिंह बिष्ट ने याचिका में कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों, विशेषकर डीजी मेडिकल हेल्थ ने मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया होता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य मेडिकल बोर्ड ने 16 अप्रैल 2026 को एक बार फिर अस्पष्ट मेडिकल प्रमाणपत्र जारी किया, लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद इसकी प्रति गिरधर सिंह को उपलब्ध नहीं कराई गई। उनकी मृत्यु के बाद कुलदीप सिंह ने सूचना के अधिकार अधिनियम के माध्यम से उक्त प्रमाणपत्र प्राप्त किया। कुलदीप सिंह ने हाईकोर्ट से मामले की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों, डीजी मेडिकल हेल्थ सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और डीजी मेडिकल हेल्थ से जवाब तलब किया है।