नैनीताल हाईकोर्ट ने समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली 11 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 12 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में हुई।
नैनीताल हाईकोर्ट ने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 12 अक्तूबर की तिथि नियत की है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए समान नागरिक संहिता बिल के खिलाफ दायर 11 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अदालत में पेश न हो पाने के कारण सरकार ने सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सभी पक्षकारों की सहमति से अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तिथि तय कर दी और तब तक संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देते हुए कहा था कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकाओं में विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण, मुस्लिम समाज के विवाह, तलाक, इद्दत और विरासत से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। इससे पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने सरकार द्वारा यूसीसी नियमावली में संशोधन की बात पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।