आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बड़ों से ज्यादा बच्चे तनाव में आ रहे हैं। इस तनाव में बच्चों के जान देने व परिवार छोड़ने के मामले बढ़ गए हैं। ऐसे ही दो मामले सामने आए हैं पहली घटना में ऊधमसिंह नगर में मां ने डांटा तो बच्ची ने जहर खाकर जान दे दी। दूसरी घटना में पिता ने डांटा तो दो बहनें घर छोड़कर चली गईं।
केस नंबर एक
संजय कालोनी निवासी टेंपो चालक ने बृहस्पतिवार देर शाम 17 वर्षीय बड़ी बेटी को फोन पर बात करने पर डांट लगा दी। उन्होंने 15 वर्षीय छोटी बेटी से भी पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा और टेंपो चलाने निकल गया। इससे नाराज होकर दोनों बेटियां घर छोड़ कर चली गईं। रात को करीब 9.15 बजे लौटा तो घटना का पता चला। इतना नहीं बेटियों ने चाची को फोन कर ढूंढने के लिए मना भी किया। फिलहाल पिता ने कोतवाली में बेटियों की गुमशुदगी दर्ज कराई है।
केस नंबर दो
नगला पंतनगर निवासी सेंचुरी पेपर मिल में काम करते हैं। उनकी 14 साल की बेटी देर बृहस्पतिवार की देर शाम घर में शोर शराबा कर रही थी जबकि बड़ी बहनों की परीक्षाएं चल रही हैं। इस पर मां ने उसे डांट दिया और बकरियां चराने चली गई। डांट से नाराज होकर बेटी ने सल्फास खा लिया। जब रात को 9-10 बजे तबीयत बिगड़ी तो परिजनों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां जहरीला पदार्थ खाने का पता चला। परिजनों ने उसे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
क्या कहते हैं मनोविशेषज्ञ
वर्तमान में बच्चों में सहनशीलता खत्म हो रही है, वे छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं इसलिए उन्हें डांट के साथ प्यार भी दे। गलती को प्यार से समझाएं ताकि वे आत्मघाती कदमों से दूर रहें।
-डॉ. युवराज पंत, मनोवैज्ञानिक, सुशीला तिवारी अस्पताल
माता पिता ये बरतें सावधानियां
= माता-पिता बच्चों के साथ नियमित तौर पर बातचीत करें
= हर जिद के अच्छे और बुरे पहलू समझा कर बच्चों को प्यार से मनाएं
= कोई गलती होने पर डांटें जरूर लेकिन प्यार से फिर भी समझाए
= 14-18 आयु के बीच कई शारीरिक, मानसिक, भौतिक बदलाव होते हैं इसलिए इन्हें ध्यान में रखते हुए बच्चों से संवाद करें
= पाश्चात्य सभ्यता और दिखावे से दूर रहें, बच्चों को संस्कार दें