फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चोरगलिया नहीं अब नारायण नगर

Sun, 24 Jul 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,नारायण नगर (नैनीताल)
विज्ञापन
महापंचायत के बाद उप‌स्‍थति युवा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पिछले 10 दिनों से चली आ रही मुहिम को क्षेत्रवासियों ने रविवार को अमलीजामा पहना दिया। अमर उजाला द्वारा चलाए गए अभियान और युवाओं की दिनरात की मेहनत रंग लाई। चोरगलिया का नाम बदलने की मुहिम पर महापंचायत ने अपनी मुहर लगा दी। अब इसे नारायण नगर नाम दिया गया है। चोरगलिया को नारायण नगर नाम मिलते ही क्षेत्रवासी खुशी झूम उठे। युवाओं के चेहरे पर जबरदस्त खुशी थी।
विज्ञापन


चोरगलिया नामांतरण पर नारायण नगर की मुहर लगने के बाद महापंचायत में ही युवाओं ने ऐलान किया कि नामांतरण संघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल सोमवार को क्षेत्रवासियों का हस्ताक्षर युक्त प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री से नए नाम का शासनादेश जारी करने का आग्रह करने के लिए 26 जुलाई को देहरादून जाएंगे। 

महापंचायत को लेकर रविवार सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। चार ग्राम पंचायतों के सैकड़ों महिला, पुरुष और युवा सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में जुटने शुरू हो गए। प्रशासन ने विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस फोर्स का भारी इंतजाम किया था। एक-एक कर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं को मंच पर अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया।
विज्ञापन


सभी का एक ही मत था कि इस नाम को तो बहुत पहले बदल देना चाहिए था। आज अमर उजाला ने अभियान चलाकर युवाओं को नाम बदलने के लिए प्रेरित किया। युवाओं ने जिस लगन और मेहनत के साथ क्षेत्रवासियों को एकजुट कर महापंचायत आयोजित की। वह नाम बदलने की सबसे बड़ी सफलता है। मंच पर वक्ताओं ने करीब आधा दर्जन नाम सुझाए।

इसमें से नारायण नगर नाम पर सभी की आम राय रही और इस नाम पर अंतिम मुहर लगा दी गई। संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने कहा कि सभी के आशीर्वाद और सहयोग से आज क्षेत्रवासियों को अपनी पहचान बनाने का मौका मिला है, लेकिन नामांतरण तक अभियान जारी रहेगा। लाखनमंडी के ग्राम प्रधान छत्रपति बेलवाल की अध्यक्षता और भुवन पोखरिया के संचालन में हुई महापंचायत में मनोज बर्गली, पंकज बजेठा, मदन सिंह ततराड़ी, महेश बजेठा, दुर्गा कोरंगा, षष्ठी दत्त बजेठा, हरेंद्र बोरा, हरेंद्र बर्गली, लीलाधर बजेठा, गणेश, उमाकांत पोखरिया, लक्ष्मण सिंह बोरा, प्रकाश बिष्ट, धर्मेंद्र दानी, नारायण जोशी समेत तमाम लोगों ने विचार रखे।

महापंचायत में करीब साढ़े पांच सौ लोगों ने नामांतरण प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। इससे पूर्व हस्ताक्षर अभियान में संघर्ष समिति द्वारा तीन हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षर कराए गए थे। आज महापंचायत के बाद भी हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। संघर्ष समिति का दावा है कि 90 फीसदी लोगों ने नामांतरण के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं। नाम बदले जाने पर सभी ने एक दूसरे को बधाई दी और नए नाम से ही अब अपनी पहचान बनाने का संकल्प लिया।   

राष्ट्रगान से हुआ महापंचायत का समापन

चोरगलिया नामांतरण महापंचायत का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। महापंचायत में मौजूद सभी लोगों ने सावधान की मुद्रा में समवेत स्वर में जन-गण-मन का गायन किया।

अब नाम बदलने के लिए यह किए जाएंगे कार्य

जब तक नामांतरण का शासनादेश नहीं हो जाता तब तक नामांतरण संघर्ष समिति द्वारा क्षेत्र में नारायण नगर की पहचान बनाने के लिए फौरी तौर पर कुछ काम किए जाएंगे। जिनमें मुख्यरूप से दुकानों के आगे लगे बोर्ड में चोरगलिया के स्थान पर नारायण नगर नाम लिखवाना, स्कूलों में बच्चों में चोरगलिया की जगह नारायण नगर नाम से अपनी पहचान बनाने के लिए प्रधानाचार्यों से प्रार्थना स्थल पर उन्हें नियमित रूप से इसका बोध कराने, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप में चोरगलिया को नारायण नगर नाम से जानने के संदेश भेजे जाएंगे।

आज डीएम से मिलेंगे संघर्ष समिति पदाधिकारी

संघर्ष समिति पदाधिकारी नए नाम का क्षेत्रवासियों का हस्ताक्षरित प्रस्ताव लेकर आज जिलाधिकारी के पास जाएंगे। संघर्ष समिति के मनोज बर्गली, दुर्गादत्त पलड़िया और कृष्णानंद पांडे ने बताया कि हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। 26 जुलाई को संघर्ष समिति पदाधिकारी देहरादून जाकर मुख्यमंत्री से नारायण नगर नाम का शासनादेश जारी करने का अनुरोध करेंगे।  शासन से जीओ जारी होने तक संघर्ष समिति का अभियान जारी रहेगा।

भारी पुलिस बल था तैनात
विरोध की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। हल्द्वानी के कोतवाल आरएस ह्यांकी, लालकुआं के कोतवाल विपिन चंद्र, चोरगलिया के थानाध्यक्ष शांति प्रसाद गंगवार के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद थे। महापंचायत में किसी तरह का व्यवधान न हो इसके लिए दोनों कोतवाल और थानाध्यक्ष स्वयं ही मोर्चा संभाले हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें