पहाड़पानी सरकारी अभिलेखों में एक आदर्श कस्बा है, लेकिन यहां मूलभूत समस्याओं का अंबार है। धारी ब्लॉक का यह गांव नैनीताल और अल्मोड़ा जिले की सीमांत में बसा है।
पर्यटन की दृष्टि से बेहद खूबसूरत कस्बे में सार्वजनिक शौचालय तक नहीं है। यहां आने वाले पर्यटकों और पड़ाव में रुकने वाले यात्रियों को शौचालय के लिए जंगलों की तरफ दौड़ना पड़ता है।
व्यवसायी माधोसिंह बताते है कि चंपावत, पिथौरागढ़ और शहर फाटक की अधिकांश बसें और टैक्सियां पहाड़पानी पड़ाव में रुकती हैं। अधिकांश यात्री बसों से उतरते ही आसपास शौचालय खोजते हैं।
व्यवसायी बताते हैं कि कई यात्रियों को शौचालय के लिए घर भेजते हैं। हरीश नेगी बताते हैं कि रोडवेज का भी स्टॉप है। लंबी रूट की अधिकतर बसें रुकती हैं। लेकिन यात्री सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र काफी पिछड़ा है।
हेम चंद्र जोशी कहते हैं कि पर्यटन सीजन में इलाका पर्यटकों से गुलजार रहता है। जाड़ों में लोग परिवार के साथ हिमपात देखने आते हैं। खासतौर पर रीठा साहिब गुरुद्वारा के यात्री यहीं पड़ाव डालते हैं। सार्वजनिक शौचालय न होने से पर्यटकों को भटकना पड़ता है।
जीवन सिंह बर्गली कहते हैं कि पहाड़पानी कस्बे में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत है, ताकि इलाके का विकास हो सके। शेखर महतोलिया कहते हैं कि इलाका राजनीतिक दृष्टि से भी उपेक्षित है।
विधायक और सांसद तो कभी इलाके में आते ही नहीं है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की कोई सुनने को तैयार नहीं है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने शौचालय समेत बुनियादी सुविधाओं के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा है।