प्रदेश को अगर कोई गर्त में ले जा रहा है तो उसमें सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों की अहम भूमिका है। प्रदेश के मंत्री और अधिकारियों को जन सरोकारों से कोई लेनादेना नहीं रह गया है। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। प्रदेश भर पेयजल का गंभीर संकट बना है, लेकिन अधिकारी मंत्री जी की धर्म यात्रा के सफल संचालन की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। यही हाल रहा तो प्रदेश की जनता पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम हो जाएगी। और तो और इस प्रदेश को सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाएगा।
प्रदेश में पेयजल का गंभीर संकट है। ऐसे समय में प्रदेश के शिक्षा और पेयजल मंत्री मंत्रिप्रसाद नैथानी जनसमस्याओं का समाधान करने के बजाए जगदीशशिला डोला लेकर प्रदेश की धर्मयात्रा पर निकले हैं। जगदीशशिला डोला यहां पहुंचने पर तब और आश्चर्य हुआ जब जगदीशशिला डोला लेकर धार्मिक यात्रा पर चल रहे मंत्री यात्रा से नदारद रहे और उनकी धार्मिक यात्रा के इस डोले को उनके अधीनस्थ विभागों के अधिकारी लेकर चलते दिखे। देहरादून में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के आगमन की सूचना पर पेयजल मंत्री मंत्रिप्रसाद नैथानी विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होने के लिए धार्मिक यात्रा बीच में छोड़कर देहरादून चले गए, लेकिन उनकी धार्मिक यात्रा बदस्तूर जारी रही।
सोमवार को जगदीशशिला डोला हल्द्वानी के सत्यनारायण मंदिर पहुंचा। यहां डोले के साथ जिले के शिक्षा और पेयजल अधिकारी साथ चल रहे थे। हों भी क्यों नहीं आखिर उन्हें प्रोटोकाल का जो ध्यान रखना है। जनता से कोई सरोकार नहीं, बल्कि मंत्री जी की व्यक्तिगत यात्रा को निर्बाध रूप से संपन्न कराना उनका प्रमुख कर्तव्य बन गया है। जगदीशशिला डोले के साथ अपर शिक्षा निदेशक, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जलनिगम, जल संस्थान के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में महकमे के कर्मचारी मौजूद थे। इसके अलावा कांग्रेस के केदार पलड़िया, बलवीर रावत, वीरेंद्र सिंह देउपा, विकास गुणवंत, योगेश जोशी, हिमांशु जोशी, विपिम खोलिया के अलावा उनके पुरोहित रतूड़ी थे। जगदीशशिला डोला मंगलवार को रामनगर, काशीपुर, जसपुर होते हुए कोटद्वार पहुंचेगा।