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चुनाव के लिए नेताओं ने रखा है करोड़ों काला धन

Tue, 15 Nov 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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 ब्लैक मनी की बदौलत वोटों की खरीद फरोख्त कर विधायक और फिर मंत्री बनने का ख्वाब देखने वाले नेताओं को नींद उड़ी है। नेताओं के पास करोड़ों रुपए की ब्लैक मनी पड़ी है। आयकर विभाग की छापामारी से बचने के लिए नेताओं ने ब्लैक मनी को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है। ब्लैक मनी को व्हाइट करने की माथापच्ची में अधिकांश नेताओं ने हाई ब्लड प्रेसर की दवा की डोज भी बढ़ा ली है। एक बड़े नेता के डॉक्टर की शरण में पहुंचने की चर्चा तक है। प्रापर्टी कारोबार से जुड़े अधिकांश सफेदपोश नेताओं के फोन स्विच ऑफ और आउट ऑफ कवरेज हो गए हैं।
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पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। जमकर वोटों की खरीद फरोख्त होती है। चुनाव से पहले टिकट के लिए भी बोली लगती है। प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव हैं। भाजपा और कांग्रेस से अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं। नैनीताल जिले में हर सीट से भाजपा और कांग्रेस के दावेदारों की लंबी लाइन है। हर बार की तरह इस बार कई दावेदारों ने चुनाव लड़ने की मंशा में काला धन जमा किया है। नैनीताल जिले में हल्द्वानी, लालकुआं, कालाढूंगी और रामनगर सीट पर वोटों की खरीद फरोख्त में जमकर पैसा बहेगा। जबकि भीमताल, नैनीताल में प्रत्याशियों की बोली लगने की संभावना है। 


सूत्रों के मुताबिक अधिकांश नेताओं ने चुनाव लड़ने के लिए तीन से पांच करोड़ का काला धन जमा किया है। काला धन नजदीकी लोगों के ठिकानों पर छिपाया है। पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में चलन से बाहर होने से नेताओं का काला धन डूब रहा है। अधिकांश नेताओं का कोई कारोबार नहीं है। सफेद कुर्ते की चमक के पीछे नेताओं की काली कमाई पर पानी फिरना तय है। जिन नेताओं का साइड बिजनेस है भी, उनके पास बैंक लिमिट से कई गुना अधिक काला धन है। 30 दिसंबर के बाद काला धन सिर्फ कागज के टुकड़े रह जाएगा। 
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काले धन ठिकाने लगाने की माथापच्ची में नेताओं की नींद उड़ी है। कोई चार्टर्ड एकाउंटेंट से सलाह ले रहा है तो कोई बड़े औद्योगिक घरानों से संपर्क कर काले धन को व्हाइट कराने के लिए चक्कर काट रहा है। कुछ नेता 30 से 35 फीसदी कमीशन पर ब्लैक मनी को व्हाइट कर रहे हैं। इसके लिए दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से हवाला के जरिए पैसे का लेनदेन हो रहा है। 


कुछ नेता सट्टे में काला धन लगा रहे हैं। सट्टे में भी कमीशन बढ़ गया है। कुछ नेताओं की बैंकों में मजबूत पकड़ है। नेता बैंकों में बड़े नोट बदलवाकर काले धन को व्हाइट कर रहे हैं। हालांकि, इन सब माथापच्ची के बाद भी अधिकांश नेताओं को निराश होना पड़ रहा है। टेंशन में कई नेताओं ने हाई ब्लड प्रेसर की डोज तक बढ़ा ली है। कई नेताओं ने भरोसेमंद और नजदीकी लोगों को काला धन बांटना शुरू कर दिया है, ताकि 30 दिसंबर से पहले तक काला धन वोटों के ठेकेदारों के खातों में व्हाइट हो जाए। 
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