मानसून की दस्तक के बाद अब प्रदेश में आपदा प्रभावित अति संवेदनशील गांवों को याद किया गया है। प्रदेश के साढ़े तीन सौ से अधिक गांवों के विस्थापन की चुनौती का सामना करने के लिए भी मात्र दस करोड़ रुपये का ही बजट है।
मानसून के प्रदेश में जल्द धमक पड़ने की उम्मीद आपदा प्रबंधन विभाग को भी नहीं थी। मानसून के उत्तराखंड पहुंचने की घोषणा के बाद अब आपदा प्रबंधन विभाग को याद आया कि प्रदेश में खतरे की जद में आये गांवों को भी विस्थापित किया जाना है। अब तेजी दिखाते हुये खतरे की जद वाले कुछ गांवों को शिफ्ट किया जा रहा है। प्रदेश में लागू पुनर्वास नीति के तहत विस्थापन से पहले गांवों की सहमति लेनी भी जरूरी है। अभी तक केवल 73 गांवों का ही सर्वे हो पाया है।
अब शासन स्तर पर बैठक कर पहले यह तय किया जाएगा कि दस करोड़ रुपये के बजट में कितने और किन गांवों का विस्थापन किया जाए। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस काम को आगे बढ़ाने के लिए भी खाका तैयार किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक केंद्र से इस काम के लिए 800 करोड़ रुपये मांगे गये थे। इस मद में पैसा न मिलने की वजह से राज्य को उपलब्ध बजट से ही काम चलाना होगा।