राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग से हिमालयन सोसायटी फार हैरिटेज एंड आर्ट कंजरवेशन की ओर से चल रही पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला में शुक्रवार को प्रशिक्षणार्थियों को पांडुलिपियों में लगने वाले कीटों की जानकारी दी गई।
मास्टर ट्रेनर ललित पाठक और संरक्षण सहायक रेनू कोहली ने बताया कि विभिन्न प्रकार के कीड़े हैं, जो कागज को क्षति पहुंचाते हैं। कीड़ा लगी पांडुलिपियां बुरादे की तरह बिखर जाती हैं। उन्होंने पुरानी और नई वैज्ञानिक विधि से कागज को संरक्षित करने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिल्वर फिश, कॉकरोच, बुक वार्सर (किताबी कीड़ा), दीमक, बुक लाइस और चूहों से पांडुलिपियां खराब हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि इन्हें सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर संरक्षण की जरूरत पड़ती है। इसलिए इस ओर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। कार्यशाला में नरेश कुमार, रवींद्र सुमन, रिंकेश कुमार, ज्योति, एहसान सिद्दीकी, सोनी बिष्ट, प्रशांत डोगरे, रोहिणी राणा, शिव, चंद्रशेखर कांटे आदि थे।