थोक मंडी में इलेक्ट्रानिक कांटे के नाम पर मंडी परिषद को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। इस मामले में अब तक कोई जांच नहीं होने पर सवाल उठाया गया है।
व्यापार मंडल की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि थोक मंडी में साढ़े चार करोड़ की लागत से इलेक्ट्रानिक कांटे लगवाए गए। जो कि बगैर चले चार साल बाद अब हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी किस तरह बर्बाद करते हैं इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
पहले मंडी में बिना किसी सर्वे के इलेक्ट्रानिक कांटे लगवाए गए, जब जंक लगकर बेकार हो गए तो दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिए गए। बैठक में डा. धर्मप्रकाश यादव, राजेंद्र सिंह फर्सवान एवं विरेंद्र गुप्ता ने एक स्वर में मांग सरकारी धन की बर्बादी के लिए मंडी परिषद का कौन अधिकारी जिम्मेदार है इसकी जांच कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक कांटों का निर्माण बिना किसी प्रस्ताव के क्यों कराया गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
अगर इतनी बड़ी राशि किसानों को उन्नत श्रेणी के बीज एवं सेब के पौधे लाकर देने पर खर्च की जाती तो किसानों का कितना भला होता। वक्ताओं ने कहा कि इसी तरह आनन फानन में निजी स्वार्थ के चक्कर में बागेश्वर के गरुड़ में मंडी शेड का निर्माण कराया गया है जबकि इसका कोई फायदा नहीं होने वाला। नदी किनारे किए गए यह निर्माण तेज बारिश में कभी भी ध्वस्त हो सकता है।