मंडी परिषद के निर्णय निराले ही हैं। यहां थोक मंडी में लगाए गए इलेक्ट्रानिक कांटे चार साल में भी चालू नहीं हो सके और इन्हें बिना चालू किए बगैर ही उखाड़ दिया गया। इन कांटों को लगाने पर मंडी का करीब साढ़े चार करोड़ रुपया खर्च हुआ था। अब मंडी परिषद द्वारा कांटों के स्थान पर बाउंड्री का निर्माण कराया जा रहा है जिस पर करीब 46 लाख रुपये की राशि खर्च होगी।
मालूम हो कि चार साल पहले हल्द्वानी थोक मंडी की आय बढ़ाने के मकसद से मंडी परिषद ने कंप्यूटराइज्ड इलेक्ट्रानिक कांटे लगवाए थे। इनमें से पांच कांटे निकासी गेट (मंडी बाईपास) और दो कांटे बरेली रोड (प्रवेश गेट) पर लगाए गए। मंडी के दोनों गेटों पर सात कंप्यूटराइज्ड कांटे स्थापित करने में मंडी परिषद का करीब साढ़े चार करोड़ रुपया खर्च हुआ। कांटों को संचालित करने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय से बाकायदा साफ्टवेयर तैयार कराया गया। लेकिन जब इन्हें चालू करने का वक्त आया तो मंडी के व्यवसायियों ने विरोध कर दिया जिस कारण कांटे चालू नहीं हो सके हैं।
इन कांटों का निर्माण मंडी परिषद रुद्रपुर क्षेत्र के तत्कालीन उपनिदेशक निर्माण एसएस परमार ने कराया था। उन्होंने इन कांटों को स्थापित करवाने से पहले मंडी में कोई सर्वे तक नहीं कराया। आनन फानन में बिना किसी प्रस्ताव और सर्वे के कांटे लगाकर करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए गए। इन कांटों में उसी तरह के आटोमेटिक बैरियर लगे थे जैसे कि फोरलेन हाइवे पर टोल टैक्स पर लगे होते हैं तथा पर्ची कटने पर ही आटोमेटिक बैरियर खुलते हैं। पिछले दिनों मंडी परिषद द्वारा हल्द्वानी मंडी के इन कांटों को ऊधमसिंह नगर जिले काशीपुर, सितारगंज आदि मंडियों में शिफ्ट करने के आदेश दे दिए गए जिस पर मंडी बाईपास के इलेक्ट्रानिक कांटे उखाड़वा कर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया। यहां कांटों के लिए बनाये गए बैरियर और कमरे आदि बने रह गए।
काफी समय तक न चलने की वजह से इसमें लगे एसी भी खराब हो गए। लेकिन इस योजना पर सरकारी धन बर्बाद होने के बावजूद किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। मंडी परिषद (निर्माण) के उपनिदेशक रामानुज गुप्ता ने बताया कि कांटो के पास लगे बूम बैरियर के पास बाउंड्रीवाल और गेट बनाने का काम चल रहा है। इस कार्य पर 46 लाख रुपया खर्च आएगा। बाउंड्रीवाल की लंबाई करीब साढ़े तीन सौ फीट है।