मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) का गठन किया है। इस टीम का कंट्रोल रूम और संसाधन अंतरराष्ट्रीय जू में रहेंगे। यहां पर तैनात एसडीओ स्तर के अधिकारी को टीम का मुखिया बनाया गया है।
पश्चिमी वृत्त में रामनगर, तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय और हल्द्वानी वन प्रभाग आते हैं। यहां पर हाथी, बाघ, तेंदुआ के हमले आदि होते हैं, इसके अलावा वन्यजीव भी खेतों में लगाये गए तार के जाल में फंसते हैं।
ऐसे में घटना होने पर कई बार अफरातफरी की स्थिति रहती है और नैनीताल चिड़ियाघर या फिर कार्बेट पार्क से विशेष बचाव टीम को बुलाना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय जू के सीईओ व पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि संघर्ष को कम करने, कम समय में बेहतर ढंग से बचाव अभियान चलाने के लिए क्यूआरटी का गठन किया गया है।
शुरुआत में दस कर्मी टीम में रहेंगे और यह टीम अंतरराष्ट्रीय जू के एसडीओ जीएस कार्की के निर्देशन में काम करेगी। टीम के प्रमुख को ट्रंकोलाइजर गन, हाथी, बाघ को बेहोश करने वाली सभी दवा, पिंजरे, जाल से लेकर सभी संसाधनों को जुटाया जा रहा है। विशेष टीम संबंधित प्रभागों के लिए बैकअप के तौर पर काम करेगी।