वन निगम ने खनिजों के रेट बढ़ा दिये हैं। इससे घर बनाना महंगा हो सकता है। निगम ने बढ़े हुए रेट को इसी सत्र से लागू करने का फैसला किया है।
घर बनाने के इच्छुक लोग गौला खुलने का इंतजार करते हैं। नदी में जब खनन हो रहा होता है, तो तुलनात्मक तौर पर खनिज के रेट कम होते हैं।
पर इस बार नदी खुलने और बंद होने दोनों स्थितियों में खनिज के रेट बढ़ने की संभावना है। इसका कारण वन निगम का ही खनिज रेट के दामों में वृद्धि करना है।
वन निगम 11 तरह के शुल्क जिसमें रायल्टी, स्टांप शुल्क से लेकर अभिवहन शुल्क होता है, उसमें अभी तक प्रति कुंतल 13 रुपया 70 पैसे शुल्क वसूला जाता था।
पर अब इसमें वृद्धि कर दी गई है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के एसडीओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया कहते हैं कि अब प्रति कुंतल 23 रुपये 10 पैसे के हिसाब से भुगतान डंपर स्वामियों को करना होगा।
यह वृद्धि करीब चार साल बाद की गई है। वहीं, रेट बढ़ाने से एक अनुमान से अगर गौला में खनन 220 दिन चलता है, तो करीब 22 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व सरकार को मिलेगा।
वहीं, खनन स्वामियों ने बढ़े रेट से भुगतान किया तो आशंका है कि वह इसकी भरपाई जनता से ही करेंगे। ऐसे में भविष्य में रेट बढ़ने की संभावना है।
जिसका असर घर बनाने पर पड़ सकता है। इसके अलावा निर्माण एजेंसियों की लागत पर असर आ सकता है। ज्ञात हो कि शासन ने खनन की मात्रा बढ़ाने के लिए भार में भी बदलाव किया है। इससे करीब ढाई करोड़ क्विंटल खनिज खनन की मात्रा बढ़ जाएगी।