पावर कारपोरेशन बिना किसी आधार के मनगढ़ंत बिल उपभोक्ताओं को थमा रहा है। ऐसे ही एक मामले में विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच ने उपभोक्ता के लगभग पांच साल के बिलों को संशोधित करने का आदेश दिया है।
राजपुरा हल्द्वानी निवासी रानी देवी अपने बिलों और मीटर को लेकर काफी परेशान थीं। यूपीसीएल दफ्तर में जाने पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। रानी देवी को अगस्त 2009 से आईडीएफ के तहत 52 यूनिट बिजली का बिल उपभोक्ता को भेजे जा रहे थे, जिसे बिना किसी आधार के अप्रैल 2013 से 202 यूनिट कर दिया गया। उपभोक्ता को कभी 282 यूनिट, कभी 996 यूनिट के बिल भेजे जाते रहे, जो औसतन तीन गुना से अधिक के थे।
फोरम में सुनवाई के दौरान यूपीसीएल इसका कोई आधार प्रस्तुत नहीं कर सका, जबकि उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के नियमों के तहत पिछले तीन बिलिंगसाइकिल के औसत के आधार पर आईडीएफ के बिल भेजे जाने चाहिए थे। ऐसे में फोरम के सदस्य अमरजीत सिंह, एसएस कन्याल और मनीष ओली ने पुराने वास्तविक औसत के आधार पर रानी देवी के बिल संशोधित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा यूपीसीएल मीटर चोरी होने पर उसकी कीमत उपभोक्ता से वसूल कर रहा था, जबकि आयोग के नियमानुसार परिसर के बाहर मीटर स्थापित होने पर उसकी जिम्मेदारी उपभोक्ता की नहीं होगी। फोरम ने मीटर की कीमत उपभोक्ता से नहीं वसूलने के भी निर्देश दिए।