बनभूलपुरा क्षेत्र सियासी अखाड़ा बना हुआ है। चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में राजनैतिक दल कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। कांग्रेस, सपा और बसपा एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए हर दांव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को सीमांकन कार्य के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन में राजनैतिक पार्टियों ने जहां एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, वहीं अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल तक हुआ। वित्त मंत्री के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई।
नंधौर वैली सड़क पर एक के बाद एक गुटों के रूप में धरने पर बैठे लोगों ने नारेबाजी शुरू की तो उसके शब्द तीखे होते चले गए। एक-दूसरे को दलाल बताने की होड़ मच गई। फिर गोली मारो... जैसे नारे भी लगे। इसके बाद तनाव बढ़ गया।
हालांकि बसपा का गुट केंद्र, रेलवे से लेकर राज्य सरकार के खिलाफ ही अपने को सीमित रखे रहा। बाकी दोनों गुटों में तीखे नारे लगते रहे। एक-दूसरे गुट को कमतर और खुद को कब्जेदारों का सच्चा हितैषी बनाने की होड़ लगी रही।
कांग्रेस नेता अब्दुल मतीन अहमद सिद्दीकी का कहना था कि उन्होंने गफूर बस्ती के लिए सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष किया। इसी का परिणाम रहा कि बस्ती उजड़ नहीं सकी। इस बीच मंडी अध्यक्ष सुमित हृदयेश ने मतीन के सुर में सुर मिलाया।
वहीं, सपा नेता शोएब अहमद सिद्दीकी का कहना कि हाईकोर्ट के निर्देश का सम्मान करते हैं, लेकिन वित्तमंत्री इंदिरा हृदयेश का कहना कि बस्ती नहीं उजड़ेगी, मालिकाना हक मिल चुका है, यह सब दावे और आश्वासन झूठे निकले हैं।
सपा प्रदेश सरकार से पुनर्वास चाहती हैं। बनभूलपुरा संघर्ष समिति के संयोजक उवैस राजा का आरोप था कि वित्तमंत्री गफूर बस्ती की गरीब जनता के साथ छल कर रही हैं। जनता के सामने वित्तमंत्री का झूठ उजागर हो गया है।
इधर, बसपा नेता शकील अहमद केके का आरोप है कि केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों गफूर बस्ती के लोगों को उजाड़ना चाहते हैं। यह वही क्षेत्र है, जो कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है और आज स्थिति यह है कि कांग्रेस को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।