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सीमांकन के विरोध में प्रदर्शन, जाम लगाया

Fri, 09 Dec 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
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सीमांकन के विरोध में प्रदर्शन, जाम लगाया - फोटो : अमर उजाला
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प्रशासन, रेलवे की टीम और सुरक्षा कर्मियों को अतिक्रमित क्षेत्र के दूसरे चरण के सीमांकन कार्य के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा। बृहस्पतिवार को सीमांकन का कार्य शुरू होते ही कांग्रेस, बसपा, सपा और बनभूलपुरा संघर्ष समिति ने कार्रवाई का विरोध करने के साथ ही शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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संगठनों ने बनभूलपुरा थाने के सामने तीन जगहों पर धरना शुरू कर दिया। इसके अलावा नंधौर वैली सड़क जाम कर दी। घंटों नारेबाजी चलती रही और पुलिस, प्रशासन के अधिकारी असहाय बन रहे। बाद में अफसरों द्वारा कार्यवाही को ईद मिलादुन्नबी (12 दिसंबर) तक टालने का आश्वासन दिए जाने पर धरना खत्म हुआ।

हाईकोर्ट ने रेलवे की जमीन पर कब्जा खाली कराने का आदेश दिया है। इस आदेश के तहत 10 सप्ताह के भीतर कार्यवाही होनी है। पहले चरण में 17 नवंबर को संयुक्त सीमांकन और 24 नवंबर को जन सुनवाई भी काठगोदाम में हो चुकी है।
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दूसरे चरण में संयुक्त सीमांकन किदवईनगर क्षेत्र से शुरू होना था। इसके लिए बृहस्पतिवार सुबह करीब 10:45 बजे रेलवे की टीम वरिष्ठ मंडल अभियंता अरुण कुमार, आरपीएफ कमांडेेंट के निर्देशन में पहुंची और प्रशासन, पुलिस के साथ सीमांकन शुरू हुआ।

यह काम जैसे ही शुरू हुआ, हुनर परिषद के अध्यक्ष मतीन सिद्दीकी, मंडी समिति के अध्यक्ष सुमित हृदयेश ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद सपा प्रदेश महासचिव शोएब अहमद भी विरोध में कूद गए और थाने के पास धरने पर बैठ गए।

इसके बाद बसपा के प्रत्याशी शकील अहमद भी समर्थकों के साथ पहुंचे और विरोध के साथ सड़क धरना शुरू कर दिया। इस बीच बनभुलपुरा संघर्ष समिति ने उवैस राजा के साथ मोर्चा संभाला और सपा के साथ धरने पर बैठे गए।

सड़क पर तीन अलग खेमे लग गए और नारेबाजी शुरू हो गई। सभी गुट शक्ति प्रदर्शन में लगे रहे। केंद्र, राज्य, रेलवे से लेकर वित्त मंत्री के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई और एक-दूसरे पर नारों के जरिए निशाना साधा जाने लगा।

इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। एक बार तो स्थिति ऐसी बनी कि सपा, बनभुलपुरा संघर्ष समिति और कांग्रेस समर्थक एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए और तीखी नोंकझोंक हो गई। ऐसे में मारपीट जैसी घटना को रोकने के लिए दोनों गुटों के बीच पुलिस फोर्स को तैनात किया गया।

घंटों नारेबाजी चलती रही। इसी बीच अधिकारियों ने कोर्ट का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को स्थिति को समझने को कहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 12 को ईद मिलादुन्नबी है। जुलूस आदि निकलेगा पुलिस, प्रशासन को यह समझना चाहिए। अधिकारियों ने त्यौहार के बाद सीमांकन कार्य का विरोध नहीं करेंगे, इसकी गारंटी देने को कहा। इसको लेकर कोई भी आगे नहीं आया।

बाद में प्रशासन ने फिर कोशिश शुरू की और धरने पर बैठे लोगों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का विकल्प दिया। इसमें शकील अहमद को छोड़कर कोई भी मुख्य नेता नहीं पहुंचा। काफी देर बाद प्रशासन, पुलिस, रेलवे ने कार्रवाई को 12 तक टालने का फैसला किया और इसकी सूचना एसडीएम एपी वाजपेयी, सीओ लोकजीत सिंह ने सभी गुटों को दी।

इसके बाद धरना दोपहर करीब तीन बजे समाप्त हुआ। ऐसे में नंधौर वैली रोड पर करीब तीन घंटे तक जाम की सी स्थिति रही। हालांकि कांग्रेस और सपा के खिलाफ नारेबाजी और एक तरह का जुलूस निकालने का दौर कुछ देर तक और चला।
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