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पुस्तकालय घोटाला : हाईकोर्ट में राज्य सरकार समेत अन्य ने दाखिल किया जवाब

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नैनीताल। हाईकोर्ट में हरिद्वार में 2010 में हुए पुस्तकालय घोटाले में दायर जनहित याचिका पर पूर्व के पारित आदेश के क्रम में नगर निगम, सरकार व डीएम ने जवाब दाखिल कर दिया है। जवाब में कहा है कि अभी पुस्तकालय का संचालन नहीं हुआ है और न ही किसी संस्था को हस्तांतरित किया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस पर प्रति शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तिथि नियत की गई है।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका में कहा था कि 2010 में तत्कालीन विधायक मदन कौशिक की ओर से विधायक निधि से करीब डेढ़ करोड़ की लागत से 16 पुस्तकालय बनाने के लिए पैसा आवंटित किया गया था। पुस्तकालय बनाने के लिए भूमि पूजन से लेकर उद्घाटन और फाइनल पेमेंट तक हो गई, लेकिन धरातल पर आज तक किसी भी पुस्तकालय का निर्माण नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि विधायक ने तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी सहित ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने बड़ा घोटाला किया है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि पुस्तकालय निर्माण का जिम्मा ग्रामीण अभियंत्रण सर्विसेस को दिया गया था। विभाग के अधिशासी अभियंता के फाइनल निरीक्षण और सीडीओ की संस्तुति के बाद काम की फाइनल पेमेंट होती है। अधिशासी अभियंता और सीडीओ की ओर से बिना पुस्तकालय निर्माण के ही फाइनल रिपोर्ट लगाकर पेमेंट कर दिया गया। स्पष्ट है कि अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाला हुआ है। याचिकाकर्ता इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से राज्य सरकार, जिलाधिकारी हरिद्वार, नगर निगम और वर्तमान में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और रामजी लाल को पक्षकार बनाया गया है।
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