हल्द्वानी। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने को लेकर कई कोशिश हो रही हैं, इसी के तहत पहली बार कुमाऊं में तेंदुए पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर का इस्तेमाल किया गया है। रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में बागेश्वर से पकड़े गए तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा गया है। इस तेंदुए के मूवमेंट पर रेडियो कॉलर से नजर रखी जा रही है।
बागेश्वर के मालता गांव में छह नवंबर को एक घर से वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ा था। यह तेंदुआ करीब सात साल का है। बाद में इस तेंदुए को रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में रखा गया। बाद में वन विभाग की टीम ने तेंदुए को रेडियो कालर लगाकर उसके प्राकृतिक वास स्थल में छोड़ने का फैसला किया। इसी के तहत हरिद्वार वन प्रभाग और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून के विशेषज्ञ एंटीना (वीएचएस तकनीक पर आधारित) और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लेकर रानीबाग पहुंचे।
यहां पर रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. दीप्ती अरोरा, नैनीताल चिड़ियाघर के डॉ. हिमांशु पांगती, कार्बेट पार्क के डॉ. दुष्यंत शर्मा और तराई पूर्वी वन प्रभाग में तैनात डॉ. आयुष उनियाल की टीम ने तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाया। डॉ. दीप्ती के अनुसार सेटेलाइट के माध्यम से तेंदुए की एक खास इलाके में होने की लोकेशन मिलेगी। जरूरत पड़ने पर एंटीना के जरिए सटीक लोकेशन पर भी पहुंचा जा सकेगा। अगर तेंदुए की लोकेशन मानव आबादी के करीब मिलती है, तो उसके इलाके के वन विभाग की टीम को सतर्क किया जा सकेगा। इससे इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजस्विनी पाटिल के अनुसार कुमाऊं में पहली बार किसी तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाया गया है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
बागेश्वर में मिले तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ दिया है। प्रदेश में यह तीसरा और कुमाऊं का पहला तेंदुआ है, जिस पर रेडियो कॉलर लगाया गया है। इससे पहले हरिद्वार और पौड़ी में पकड़े गए तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा जा चुका है। - जेएस सुहाग, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन