रामनगर वन प्रभाग की पवलगढ़ रेंज के अंतर्गत ग्राम सभा रानीकोटा में तेंदुआ पालतू कुत्ते का शिकार करने के लिए एक मकान में घुस गया। मकान मालिक ने कुत्ते की आवाज सुनकर कमरे को बंद कर तेंदुए को कैद कर लिया।
हो-हल्ला होने पर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ने की कई बार कोशिशें कीं, लेकिन देर शाम तक सफलता नहीं मिल सकी। अब शनिवार सुबह फिर से अभियान शुरू किया जाएगा।
ग्राम सभा रानीकोटा निवासी ग्रामीण नंदन सिंह के परिजन रोजाना की तरह बृहस्पतिवार रात को मकान के दो मंजिलें में सो रहे थे। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक तेंदुआ उनके पालतू कुत्ते का शिकार करने के प्रयास में उनके घर के एक कमरे में घुस गया।
कुत्ते की आवाज सुनकर जागे परिजनों ने फोन से मामले की जानकारी नंदन सिंह को दी, जो कि खेत में बने एक कमरे में सो रहे थे। मौके पर पहुंचे नंदन ने कमरे को बाहर से बंद कर तेंदुए को कैद कर लिया।
हालांकि तब तक तेंदुआ कुत्ते को मार चुका था। नंदन ने मामले की सूचना सरपंच और क्षेत्र पंचायत सदस्य पदम सिंह बिष्ट को दी। हो-हल्ला होने पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इधर, सूचना पर सुबह करीब सात बजे वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी पहुंच गए।
लेकिन, वन कर्मियों के पास तेंदुए को पकड़ने के उचित संसाधन नहीं थे। इसके बाद करीब 10:30 बजे प्राणि उद्यान नैनीताल से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। डीएफओ नेहा वर्मा के नेतृत्व में देर शाम तक चले अभियान में तीन बार ट्रेंकुलाइजर गन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन एक भी फायर निशाने पर नहीं लगा।
अंधेरा होने पर एहतियातन डीएफओ ने अभियान रोक दिया। मौके पर वन कर्मी तैनात किए गए हैं। डीएफओ ने बताया कि अब शनिवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।
सुबह से शाम तक चला अभियान, नहीं कामयाबी
आठ गुणा आठ का छोटा सा कमरा, कमरे में सिर्फ एक खिड़की और उसमें रखा सामान तेंदुए को पकड़ने में आड़े आया। विशेषज्ञों ने तीन बार ट्रेंकुलाइजर गन दागी, लेकिन एक भी फायर सही निशाने पर नहीं लगा।
तेंदुआ हर बार बचकर कमरे में रखे सामान की आड़ में छुप गया। हालांकि वन कर्मियों ने कमरे की दीवार को तोड़कर भी तेंदुए को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन यह तरकीब भी काम नहीं आई।
वन कर्मियों ने मौजूद संसाधनों के साथ सुबह करीब सात बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सुबह करीब 11 कमरे की दीवार तोड़कर जगह बनाई गई और पशु चिकित्सक योगेश भारद्वाज ने ट्रेंकुलाइजर गन से पहला फायर किया, लेकिन तेंदुआ बच कर दूसरे कोने में चला गया।
इसके बाद करीब 11:30 बजे एक और बार कोशिश की गई लेकिन यह फायर भी बेकार चला गया। दो फायर बेकार होने पर वन कर्मियों ने हिम्मत कर कमरे में घुसने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला तेंदुए ने हमले का प्रयास किया।
किसी तरह वन कर्मी बाहर निकले और फिर से कुंडी लगा दी। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे तीसरी बार ट्रेंकुलाइजर गन से फायर किया गया, लेकिन यह भी निशाने पर नहीं लगा। शाम तक वन कर्मी प्रयास करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।