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ड्रिलिंग किए बगैर भी उपयोग में लाया जा सकता है रिसाव वाला पानी, भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. कोटलिया का दावा-वर्ष 2018 में ही बता दिया था नहीं है कोई भूमिगत झील

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नैनीताल। प्रसिद्ध भू वैज्ञानिक और यूजीसी के प्रोफेसर बहादुर सिंह कोटलिया ने जिला प्रशासन की ओर से बलिया नाला क्षेत्र में रिस रहे पानी के उपयोग के लिए वहां ड्रिलिंग कराने की योजना को गलत बताया है। उनका कहना है कि इसके बगैर भी इस पानी का उपयोग किया जा सकता है।
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प्रो. कोटलिया ने बताया कि बलियानाला क्षेत्र पर वह पिछले कई वर्षों से नजर रखे हुए हैं और समय-समय पर मौके पर जाकर वहां हो रहे भूस्खलन व अन्य भूगर्भीय गतिविधियों का जीपीएस से अध्ययन करते रहे हैं। प्रो. कोटलिया का कहना है कि बलियानाला का पुराना भूस्खलन वाला क्षेत्र 60 सेंटीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब से सरक रहा है। क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल की जांच के लिए उन्होंने सीमेंट के 72 पीलर भी वहां लगाए हैं। जिनका प्रत्येक तीसरे माह अध्ययन किया जाता है।
प्रो. कोटलिया ने इस क्षेत्र में भूमिगत झील होने की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह अपने अध्ययन के आधार पर वर्ष 2018 में बता चुके हैं कि इस क्षेत्र में कोई भी भूमिगत झील नहीं है और न हीं रिसाव का पानी नैनीझील से होकर आ रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने तभी साफ कर दिया था कि बलिया नाले में जो रिसाव हो रहा है वह जमीन के अंदर मौजूद प्राकृतिक स्रोत से हो रहा है।
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उनका कहना है कि उन्हें पता चला है कि जिला प्रशासन रिसाव वाले पानी के उपयोग के लिए जीजीआईसी के मैदान के आसपास कहीं ड्रिलिंग की योजना बना रहा है, जो की पूरी तरह से गलत है। प्रोफेसर कोटलिया का कहना है कि ड्रिलिंग के बजाय बेहतर यह होगा है कि जहां पर पानी का रिसाव हो रहा है, प्रशासन वहां पर पानी के भंडारण के लिए टैंक बनाए और उस टैंक के पानी को पाइपों के माध्यम से नीचे की ओर बलिया नाला में ले जाकर टैंक और बलिया नाला दोनों के पानी को टेप कर नैनीताल तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि यह पानी साल भर तक नैनीताल को मिल सकता है। प्रोफेसर कोटलिया का कहना है कि इससे जहां एक और हरिनगर वाले क्षेत्र में जमीन में नमी कम होगी और भू कटाव नहीं होगा वहीं दूसरी ओर बलिया नाला में पुराने भूस्खलन क्षेत्र की भी सुरक्षा हो सकेगी।
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