उत्तराखंड भूमिहीन श्रमिक संगठन का रामलीला मैदान में मंडलीय सम्मेलन आयोजित हुआ। वक्ताओं ने भूमिहीनों, श्रमिकों और सिडकुल का मुद्दा छाया रहा।
हंस पांडे ने कहा कि राज्य गठन की अवधारण अधूरी रह गई है। भाजपा और कांग्रेस बारी बारी से सत्ता में रही, लेकिन भूमिहीनों और श्रमिकों की किसी भी सरकार ने सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि राज्य गठन की लड़ाई लड़ने वाली उक्रांद ने भी सत्ता में सुख भोगकर जनता के साथ छल किया।
वक्ताओं ने कहा कि संगठन 1990 से राज्य में सीलिंग में निकली भूमि को पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के समय में जारी शासनादेश के अनुसार 50 फीसदी पर्वतीय मूल एवं 50 फीसदी मैदानी मूल के भूमिहीनों के जीवन यापन करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। वक्ताओं ने कहा कि किच्छा खुर्पिया फार्म सरकार के कब्जे में है। इसमें सिडकुल बसाया जाना है। उन्होंने मांग की कि सरकार उक्त भूमि पर केदारनाथ त्रासदी में चिह्नित और आपदा प्रभावित परिवारों को बसाए। वक्ताओं ने कहा कि सिडकुल में ठेकेदारी प्रथा को खत्म किया जाए। इस दौरान नंद लाल शिव करण, चंद्रपाल, किशोरी, देवी दत्त, हीराबल्लभ, पान सिंह, हरवंश सिंह, स्वर्ण सिंह, अमरीक सिंह, शंकरानंद, दीनानाथ, चंदन सिंह, मोहन नेगी, दान सिंह, शंकर उप्रेती और मंजू नेगी आदि थे। संचालन नंदलाल और अध्यक्षता हंस पांडे ने की। संगठन पदाधिकारियों ने मांगों के समर्थन में सीएम के नाम ज्ञापन भी भेजा।