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लालकुआं नगर पंचायत से ही सीख ले नगर निगम

Fri, 20 Feb 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
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नगर निगम की ‘अपनों’ ने ही लुटिया डूबो दी है। मुख्य नगर अधिकारी और मेयर के आपसी झगड़े में निगम का बंटाधार हो गया है। निगम की आमदनी बढ़ाना तो दूर इसके लिए प्रयास तक नहीं हो रहे हैं। यही वजह है कि निगम क्षेत्र में आज तक तहबाजारी और होर्डिंग्स के ठेके नहीं हो सके हैं, जबकि इनका ठेका होने भर से ही नगर निगम की आधी आर्थिक दरिद्रता दूर हो जाएगी। वहीं, छोटे से लालकुआं क्षेत्र में तहबाजारी का 21 लाख में ठेका उठा है, जबकि हल्द्वानी का क्षेत्रफल लालकुआं की तुलना में कई गुना बड़ा है।
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नगर निकाय स्ववित्तपोषित संस्थाएं हैं। निकायों को अपने खर्चे पूरा करने के लिए खुद ही आमदनी के स्रोत तैयार करने पड़ते हैं। हल्द्वानी नगर निगम इसका अपवाद बन गया है। निगम की आमदनी की तुलना में खर्चे कई गुना अधिक हैं। क्षेत्र का विकास करना तो दूर कर्मचारियों के वेतन के लिए तक सरकार के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। सबसे बड़ी वजह मेयर और मुख्य नगर अधिकारी के बीच छत्तीस का आंकड़ा होना है। आमदनी के स्रोतों का दायरा बढ़ाने के बजाए एक-दूसरे पर निशाना साधते हैं। बाकी कसर निगम के कर्मचारी पूरी कर रहे हैं, जो पूरे दिन निगम में बैठकर सिर्फ कुर्सियां तोड़ते हैं।

हल्द्वानी में निगम बनने के बाद से होर्डिंग्स का ठेका नहीं हो सका है। पूर्ववर्ती नगर पालिका में होर्डिंग्स के ठेके से लाखों रुपए आमदनी होती थी। कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से शहर अवैध होर्डिंग्स से पटा है। यही हाल तहबाजारी का है। तहबाजारी ठेके पर देने का निगम कर्मचारी ही विरोध करते आए हैं। निगम खुद तहबाजारी वसूलता है। नैनीताल जिले में हल्द्वानी को छोड़कर बाकी नगर निकायों में तहबाजारी ठेके पर है, जिससे निकाय की अच्छी आय होती है।
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लालकुआं नगर पंचायत हल्द्वानी निगम के अफसरों और जनप्रतिनिधियों के लिए सबसे बड़ी नजीर है। यहां बुधवार को 21 लाख का तहबाजारी ठेका हुआ है। हल्द्वानी निगम की तुलना में लालकुआं छोटी सी निकाय है। हल्द्वानी में निगम को मात्र सात सौ व्यापारियों से 25 रुपए रोजाना तहबाजारी मिलती है, जिससे निगम की सालाना आमदनी 21 लाख है। वक्त रहते निगम ने खुद की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाया तो वो दिन दूर नहीं जब निगम का वजूद खत्म हो जाएगा।
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