फोटो- 24 एचएलडी 02- बबीता तिवारी। स्रोत: संवाद
हल्द्वानी। संसाधनों के अभाव ने जब सपनों की गाड़ी पर ब्रेक लगाने चाहा तो हीरानगर की बबीता ने रोजाना 14 किमी का सफर पैदल तय कर इरादों की मजबूती की मिसाल दी। शुरुआत में माता-पिता के विरोध के बाद भी उन्होंने हॉकी स्टिक नहीं छोड़ी और दिन-रात कड़ी मेहनत की। इसी के दम पर वह राष्ट्रीय स्पर्धा में भी टीम का हिस्सा रह चुकी हैं।
हीरानगर निवासी 13 साल की बबीता तिवारी जीजीआईसी में कक्षा नौ की छात्रा हैं। दो साल पहले उन्होंने पीटीआई शिक्षक की प्रेरणा से हॉकी खेलना शुरू किया। आर्थिक रूप से मजबूत परिवार से नहीं होने के कारण उनके लिए रोजाना ऑटो का किराया देना संभव नहीं था।
ऐसे में हॉकी स्टिक थाम चुकी बबीता ने गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक पैदल ही जाने का निर्णय लिया। इसमें उन्हें सहेलियों का भी साथ मिला। बबीता का जुनून रंग लाया और पिछले साल मध्य प्रदेश में हुई राष्ट्र स्तरीय स्पर्धा में वह उत्तराखंड की टीम का हिस्सा थीं। उनके पिता पूरन तिवारी हार्डवेयर की दुकान में नौकरी करते हैं जबकि मां कमला तिवारी गृहिणी है। अब वह भारतीय टीम में जगह बनाने का सपना संजोए दिन-रात मेहनत कर रही हैं।