नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के 53 हजार के अधिक विद्यार्थियों को ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार आईडी) के तहत 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान मिल गई है। वर्ष 2021 से 2025 जुलाई तक का यह आंकड़ा राज्य के संस्थानों में सबसे अधिक है।
अपार आईडी का मुख्य उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, उपलब्धियों और क्रेडिट को डिजिटल रूप से एक स्थान पर सुरक्षित करना है। इससे एक राष्ट्र-एक छात्र आईडी प्रणाली के तहत उनकी पूरी शैक्षिक यात्रा को ट्रैक किया जा सके और संस्थानों के बीच स्थानांतरण को आसान बनाया जा सके। यह डाटा आधारित सिस्टम शिक्षा को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने में मदद करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत ही छात्रों की अपार आईडी बनाई जा रही है। राज्य के कुमाऊं विश्वविद्यालय में सर्वाधिक 53,248, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में 45,687, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में 43,432, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी में 28,995, उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी देहरादून में 18,200, पेट्रोलियम एवं ऊर्जा अध्ययन विश्वविद्यालय देहरादून 18,165 व उत्तरांचल यूनिवर्सिटी देहरादून में 17,678 को अपार आईडी मिली है।
भविष्य में दस्तावेज अपलोड करने की नहीं होगी जरूरत
कुमाऊं विवि के डिजी लॉकर की कोऑर्डिनेटर डॉ. उमंगी सैनी ने बताया कि 53 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को अपार आईडी के तहत 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान मिल चुकी है। सभी को अपार आईडी बनाना अनिवार्य है। वर्ष 2022-23 के जिन छात्रों की मार्कशीट, डिजी लॉकर पर उपलब्ध नहीं है, वह अपना आधार अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के अनुसार अपडेट करवा लें जिससे एबीसी आईडी से मिलान हो सके और डिजिलॉकर पर अपलोड हो सके। कहा भविष्य में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी डिजी लॉकर से ही सभी परीक्षाओं के लिए छात्रों की मार्कशीट ऑटोमैटिक मिलान कर अपलोड की जाएगी। छात्रों को दस्तावेज किसी भी परीक्षा के लिए अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी।