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कुमाऊंनी होली एक विरासत : धर्म व मजहब से कहीं ऊपर है राग व रंगों की होली

Mon, 23 Feb 2026 01:35 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। वक्त बदला और सामाजिक स्थितियां भी बदलीं, लेकिन नैनीताल में होली का उल्लास आज भी धर्म और मजहब की दीवारों को तोड़कर सबको एक सूत्र में पिरोता है। आजादी की लड़ाई से लेकर आज के दौर तक, यहां की रामलीला और रंगों का पर्व होली आपसी भाईचारे का जीवंत प्रतीक बना हुआ है। इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रही शहर की प्रतिष्ठित संस्था ''''युगमंच'''' इसका सबसे बड़ा प्रमाण है जो पिछले तीन दशकों से ''''फागोत्सव'''' का आयोजन कर कुमाऊंनी होली की समृद्ध और शालीन परंपरा को सहेजने का काम कर रही है।
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संस्था के अध्यक्ष जहूर आलम बताते हैं कि 90 के दशक के दौरान जब इस पावन पर्व पर फूहड़ता, कीचड़ और ''''कपड़ा फाड़'''' होली का चलन बढ़ने लगा था, तब बुद्धिजीवी और लोक कलाकार बेहद चिंतित हो उठे थे। जनकवि गिरीश तिवारी ''''गिर्दा'''', डॉ. विजय कृष्ण, राजीव लोचन साह, जगमोहन जोशी मंटू और विशंभर साह सखा के प्रयासों से ''''होली महोत्सव'''' की शुरुआत की गई। इनका मुख्य लक्ष्य होली को वापस उसके राग, रंग और शास्त्रीय गरिमा वाले स्वरूप में लौटाना था।

इस महोत्सव की सबसे खूबसूरत बात इसकी समावेशी संस्कृति रही है जहां मजहब कभी कला के आड़े नहीं आया। जहूर आलम के साथ-साथ इदरीश मलिक, मंजूर हुसैन, जावेद और अनवर जैसे नामों ने न केवल रंगमंच बल्कि होली के गायन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस आयोजन के माध्यम से दूरस्थ पहाड़ी अंचल की प्रसिद्ध ''''खड़ी होली'''', शास्त्रीय राग-रागिनियों पर आधारित ''''पुरुष व महिला बैठ होली'''' और पारंपरिक ''''स्वांग'''' को एक साझा मंच प्रदान किया गया।
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कमरों तक सीमित थी महिला होली

जहूर बताते हैं कि महोत्सव की शुरुआत से पूर्व महिला होली कमरों तक सीमित थी। शुरुआती प्रयासों में महिलाओं को मंच तक लाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आज नैनीताल समेत पूरे कुमाऊं में पुरुष होली की तुलना में महिला होली अधिक होती हैं। युगमंच होली महोत्सव व राम सेवक सभा के फागोत्सव 40 महिला टीमों का प्रतिभाग करना इसका प्रमाण है।



होल्यार तैयार कर रही कार्यशाला

महोत्सव की शुरुआत के बाद से ही संस्कृति कर्मियों और होल्यारों ने भविष्य में होली के स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कार्यशाला की जरूरत महसूस की। लगभग 26-27 वर्षों से कार्यशाला आयोजित की जा रही है। पुरुष होल्यारों, महिला होल्यारों के सम्मान के लिए संस्था ने होल्यारों के सम्मान की भी पहल की है।



दूरस्थ अंचलों से आती हैं खड़ी होली टीम

अब तक पचार, सतराली (बागेश्वर), पाटी, खेतीखान, बाराकोट (चंपावत), पिथौरागढ़ समेत विभिन्न ग्रामीण अंचलों से प्रतिवर्ष यहां टीमें प्रतिभाग कर चुकी हैं। इस वर्ष डॉ.देवेंद्र ओली के नेतृत्व में खेतीखान चंपावत की 40 सदस्यीय टीम पहुंच रही है।
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