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Nainital News: अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे विद्यार्थियों से दूर हो रही कुमाऊंनी

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फीचर फोटो: हल्द्वानी यूओयू में आयोजित भारतीय भाषा उत्सव में लगे स्टॉल में कुमाऊंनी टोपी पहन कर द?
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हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय ‘भारतीय भाषा उत्सव’ कार्यक्रम का सोमवार को समापन हो गया। भाषा के विद्वानों ने कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया। कहा कि इससे नई पीढ़ी के बच्चों को अपनी मातृ भाषा को जानने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे कुमाऊंनी भाषा से दूर होते जा रहे हैं। उनका अंग्रेजी पर अधिक जोर है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने कहा कि व्यक्ति और व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए मां, मातृभूमि और मातृभाषा का सर्वाधिक योगदान होता है। हमें अपने लोकल उत्पादों, भाषा तत्व एवं शिक्षा को वैश्विक परिवेश में रखकर देखना होगा। लालकुआं के विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि सरकार स्थानीय भाषाओं के लिए गंभीर है और इसका उदाहरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 है। स्थानीय बोलियों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कवायद चल रही है। कुलपति ने साहित्यकार डॉ. हयात सिंह रावत, जगदीश जोशी, बीना बेंजवाल, गणेश खुगशाल, भजनदास वर्मा को शाल ओढ़ाकर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
द्वितीय सत्र में गढ़वाली और कुमाऊंनी कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का कुमाऊंनी और गढ़वाली में पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में प्रयोगांक नाट्य संस्था नैनीताल की ओर से महाकवि भास विरचित ‘उरूभंगम’ के कुमाऊंनी रूपांतरण का नाट्य-मंचन भी किया गया।
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भाषाविद रमाकांत बैंजवाल और एमबीपीजी कॉलेज की विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभा पंत ने भारतीय भाषाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कुलसचिव डॉ. रश्मि पंत ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कार्की और कुमार मंगलम ने किया। इस मौके पर संयोजक डॉ. राजेंद्र कैड़ा आदि मौजूद रहे।
इनसेट
इन्होंने दी प्रस्तुति
महेशानंद गढ़वाली कहानीकार, जगदीश जोशी कुमाऊंनी कहानीकार, बलवीर रावत बंगाणी कहानीकार, महावीर रवांल्टा रंवाई कहानीकार, गढ़वाली साहित्यकार मुकेश नौटियाल, जगदीश जोशी ने भाषाओं पर वक्तव्य दिया। डॉ. प्रीतम अप्छयाण (गढ़वाली), बीना बैंजवाल (गढ़वाली), डॉ. सुमित रिंगवाल (गढ़वाली), गिरीश सुंदरियाल (गढ़वाली), ज्ञान पंत (कुमाऊंनी), त्रिभुवन गिरी (कुमाऊंनी), शंकर दत्त जोशी (कुमाऊंनी), हर्षवर्धन जोशी (कुमाऊंनी), भजनदास वर्मा (जौनसारी) ने रचना पाठ किया।
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