हल्द्वनी में निशांत कॉलोनी में मृतक के घर के बाहर खड़े लोग।
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जिस पिता की मेहनत से चार बेटियों की जिंदगी की गाड़ी चल रही थी, वही हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर चला गया। घर के बाहर खड़ा ई-रिक्शा अपने चालक की वापसी का इंतजार करता रहा, लेकिन परिवार का सहारा बने कुलदीप अरोड़ा अब कभी घर नहीं लौटेंगे। सड़क हादसे ने चार बेटियों के सिर से पिता का साया छीन लिया। विडंबना यह रही कि सोमवार देर रात तक बेटियों को इस दुखद हादसे की जानकारी तक नहीं थी। जिस घर में पिता की वापसी का इंतजार था, वहां कुछ ही घंटों में जिंदगी की सबसे बड़ी कमी दस्तक दे चुकी थी।
पार्षद राजेंद्र जीना ने बताया कि कुलदीप ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे। चार बेटियों में सबसे बड़ी बेटी आशी पढ़ाई के साथ एक सराफा दुकान में काम भी करती है। परिवार के लिए कुलदीप सिर्फ कमाने वाले सदस्य नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य की उम्मीद और मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा थे। परिजनों के अनुसार सोमवार को कुलदीप अपने दोस्त गुलशन के साथ बाइक से किच्छा गए थे। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और गुलशन का उनके घर भी आना-जाना था। सोमवार शाम किच्छा से लौटते समय पंतनगर में हुए हादसे के दौरान दोनों की मौत हो गई। एक साथ निकले दोनों दोस्तों की मौत की खबर से उनके परिवारों में मातम छा गया।
हादसे की सूचना मिलने के बाद कुलदीप की पत्नी हनी एक बेटी को लेकर ऊधमसिंह नगर चली गईं। घर पर मौजूद बेटियों को देर रात तक पिता की मौत की जानकारी नहीं थी। जिस पिता के लौटने से घर की रौनक जुड़ी थी, उनके हमेशा के लिए बिछड़ जाने की बात से अनजान बेटियां घर पर थीं। उधर, घर के पास खड़ा ई-रिक्शा कुलदीप की प्रत्येक दिन की मेहनत और परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारियों की याद दिला रहा था। पड़ोसियों के अनुसार बताया कि कुलदीप दिन में अपना ई-रिक्शा घर के पास खड़ा करके निकले थे।
गुलशन की जानकारी लोगों को भी नहीं
मुखानी के निशांत विहार में जब जानकारी की गई तब कुलदीप का परिवार तो मिला लेकिन गुलशन के बारे में आस पड़ोस के लोगों को भी कोई जानकारी नहीं थी। यहां तक कि गुलशन का परिवार भी क्षेत्र में नहीं रहता है ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है। वहीं यूएस नगर पुलिस की सूचना पर मुखानी पुलिस भी गुलशन का मूल पता और अन्य जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।