एक तो पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचना चुनौती है और दूसरा स्थानीय स्तर पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना बीमारी को गंभीर स्थिति तक लाना है। एसटीएच में किडनी के केस भी महिलाओं में ज्यादा हैं और डोनर भी महिलाएं ही हैं। परिवार में किसी मरीज को किडनी की जरूरत पड़ती है तो अधिकतर मामलों में महिलाएं ही आगे आकर अंगदान करती हैं। एसटीएच के यूरोलॉजिस्ट डॉ. लक्ष्मण पाल के अनुसार इसके पीछे परिवार की जिम्मेदारियां, सामाजिक सोच या फिर अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी है। इसे बदलना होगा।
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दो से तीन सप्ताह के भीतर कराएं उपचार
यूरोलॉजिस्ट डॉ. पाल के अनुसार, गुर्दे की पथरी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पुरुषों में गुर्दा खराब होने के मामलों में कैंसर अधिक सामने आया जबकि महिलाओं में आनुवांशिक कारणों और पेशाब की नली में सिकुड़न जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं। कई मरीज समय पर विशेषज्ञ के पास नहीं पहुंचे। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में उपचार की समुचित सुविधाओं का अभाव और स्थानीय स्तर पर देसी या आयुर्वेदिक उपचार पर निर्भरता भी परेशानी बढ़ाती है। डॉ. पाल के अनुसार, पथरी होने पर दो से तीन सप्ताह के भीतर इलाज कराना जरूरी है। छह मिलीमीटर से बड़ी पथरी होने पर यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। बताया कि पथरी के कारण पेशाब का प्रवाह बाधित होने पर गुर्दे में सूजन और संक्रमण हो सकता है। गंभीर स्थिति में मवाद भरने से गुर्दे को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।