नैनीताल/भवाली। जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो गए हैं। धुंध भी लोगों को परेशान कर रही है। आग से वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। काफल झड़कर नष्ट हो गए हैं। बुरांश के फूल आग से सूखने लगे हैं। रविवार को सातताल रोड़ स्थित भगत्यूड़ा से सटे जंगल में सुबह से शाम तक आग जलती रही। रानीखेत रोड़ से सटे जंगल में आग से धुंध रही।
सातताल के जंगल में वन विभाग दरोगा किशन भगत, जीवन रजवार सहित स्थानीय निवासी सचिन दुर्गापाल, लवी दुर्गापाल, देवेश कुमार, कुंदन सिंह, सुबीर मलिक, अंकित लांबा ने आग बुझाने में मदद की। वन क्षेत्र अधिकारी भवाली रेंज मुकुल शर्मा ने बताया कि फिलहाल आग पर काबू पा लिया है। धारी, ओखलकांडा और रामगढ़ ब्लॉक के जंगलों में आग लगने से वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।
नैनीताल में भी जले जंगल
नैनीताल। पाइंस व जाख क्षेत्र में आग से लगभग आधा हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गया। वन क्षेत्राधिकारी ममता चंद ने बताया कि टीम द्वारा आग पर देर शाम तक काबू पा लिया गया था। टीम में दयाशंकर टम्टा, नंदा प्रसाद, अशोक कुमार, चंदन रावत, गोविंद बिष्ट, कृष्णा शंकर, हिमांशु, पवन आदि थे।
स्टाफ और वाहनों के अभाव से जूझ रहा दमकल विभाग
नैनीताल। अग्निकांड से निपटने के लिए दमकल विभाग के पास न स्टाफ है न वाहन। मुख्यालय में 17 सिपाही कार्यरत हैं जिसमें से 6 सिपाहियों की ड्यूटी कुंभ में और दो सिपाहियों को भीमताल भेजा गया है। अब नौ सिपाहियों ने नैनीताल की कमान संभाली हुई है। वहीं विभाग के पास वाटर टेंडर, वाटर पंप और स्टाफ की कमी बनी हुई है। नैनीताल फायर स्टेशन में 10 पद रिक्त है। फायर स्टेशन से मिली जानकारी के अनुसार मार्च में 26 अग्निकांड हुए, जिसमें से 22 वनाग्नि है।
वनाग्नि से पारिस्थितिक तंत्र हो रहा प्रभावित : प्रो. तिवारी
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. ललित तिवारी का मानना है कि जंगलों में आग लगने से जानवर भोजन की तलाश में मानव आबादी की ओर रुख कर सकते हैं और मानव वन जीव संघर्ष बढ़ सकता है। वनाग्नि से पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो रहा है।