नैनीताल। लॉकडाउन के दौरान गंभीर रोगों या आकस्मिक बीमारियों के मामले में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही मामले में एक निर्धन परिवार की 12 वर्षीय किशोरी की शुगर बढ़ कर 500 पार पहुंच गई और उसकी दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया। फोन से पता चलने पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश शरद शर्मा उसके लिए देवदूत बनकर आए और बरेली में उसका इलाज करवाया। फिलहाल किशोरी स्वस्थ है।
जिला न्यायालय में एक अधीनस्थ कर्मचारी की बेटी खुशी ने अपनी हालत बेहद गंभीर होने पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश शरद शर्मा को स्वयं फोन कर मदद मांगी। जस्टिस शर्मा ने पहले खुशी को एंबुलेंस से हल्द्वानी के बृजलाल अस्पताल में भिजवाया, जहां वह कई दिन भर्ती रही। इस बीच शुगर और क्रिएटिनिन बढ़ने और किडनी के कार्य न करने से खुशी कई दिन बेहोश रही।
हालत में सुधार न होने पर जस्टिस शर्मा ने उसे सुशीला तिवारी अस्पताल में दिखवाया, लेकिन खुशी का इलाज वहां भी नहीं हुआ। फिर जस्टिस शर्मा ने किशोरी को बरेली के राममूर्ति अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्होंने नैनीताल में रहे डॉ. मवार से उसके इलाज का आग्रह किया। राममूर्ति अस्पताल पहुंचने तक खुशी का ब्लड प्रेशर बेहद नीचे जा चुका था। त्वरित और बेहतर इलाज के साथ कई दौर की डायलिसिस के बाद खुशी की सेहत में सुधार हुआ है और अब वह स्वस्थ है।