बारिश भले ही किसी को गरमी से राहत दे, लेकिन ब्यूरा खाम के आपदा प्रभावितों को यह बारिश सहमा रही है। भूस्खलन क्षेत्र में इनके घरों के ऊपर की पहाड़ी की तीखी ढाल बारिश में नई आपदा को न्यौता देने की आशंका इनको डरा रही है।
मदद का आलम यह है कि मलबा हटाने की सारी जिम्मेदारी जिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी से होते हुए ग्राम पंचायत के कंधे पर आ पड़ी है। शुक्रवार को मलबा हटाने में बीस मजदूर यह लगाए गए और इन मजदूरों को ग्राम प्रधान सुबह अब्दुल्ला बिल्डिंग से खुद ही लेकर आया।
आपदा प्रबंधन का हाल क्या है यह हल्द्वानी में ब्यूरा खाम को देखकर समझा जा सकता है। शुक्रवार को आपदा प्रबंधन तंत्र की नींद कुछ हद तक टूटी भी। खंड विकास अधिकारी और तहसीलदार मौके पर पहुंचे, लेकिन इनका यह पहुंचना भी रस्म अदायगी ही अधिक साबित हुआ।
प्रभावितों की मदद का आलम यह रहा कि प्रशासन के आदेश फोन केजरिए एक अधिकारी से होते हुए दूसरे अधिकारी तक पहुंचते रहे। डीएम की ओर से दिए गए आदेश आखिरकार ग्राम प्रधान तक पहुंचने केबाद ही कार्यरूप में बदल पाए।
ग्राम प्रधान नवीन पांडे के मुताबिक सुबह वे अब्दुल्ला बिल्डिंग से 20 मजदूरों को लेकर आए और इन सबको मलबा हटाने के काम पर लगाया। देर शाम इनको दस हजार रुपये का भुगतान भी किया गया। मुसीबत यह है कि यहां से निकाले जा रहे मलबे को डंप करने तक की जगह इनके पास नहीं है।
फिलहाल एक निजी प्लाट पर यह मलबा डंप किया जा रहा है। प्रभावितों के मुताबिक खंड विकास अधिकारी ने मलबा हटाने के लिए बजट न होने की बात की और कहा कि भू स्खलन से बचाव के लिए जाल का इंतेजाम करवा दिया जाएगा।
यह तब है जबकि ब्यूरा खाम के आपदा प्रभावित परिवार टनों के हिसाब से इकठ्ठा हो रहे मलबे के साए में जीने को विवश है। इनके लिए एक-एक पल कीमती है। लोग घरों को छोड़कर बाहर रहने को विवश है।
मिलने के लिए भी सिफारिश का सहारा
आपदा प्रबंधन तंत्र की संवेदना और चुस्ती का आलम यह है कि डीएम से मिलने तक के लिए नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश से सिफारिश करवानी पड़ी। अधिकारियों ने खुद मौके पर पहुंचने की बजाए अब इन्हें शनिवार को 11 बजे डीएम कैंप कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया है।
शनिवार को वहां पर दो जेसीबी लगाकर पानी के ढाल को खत्म किया जाएगा। मैने आज दो बार संबंधित अधिकारियों से बात की। करीब 10 मजदूर वहां पर लगाए गए हैं। पहाड़ी पर जो बड़े पत्थर अटके हैं, उन्हें भी हटाने या वहीं दबाने के लिए कहा गया है।
- दीपक चौधरी, जिलाधिकारी नैनीताल।
सुबह आठ बजे अब्दुल्ला बिल्डिंग पहुंचकर मैं मजदूर लेकर आया। ग्राम पंचायत निधि से इसका भुगतान किया जाएगा। हमें अफसोस इस बात का है कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन वाले हमारी कोई मदद नहीं कर रहे हैं। बीडीओ को यह अधिकार नहीं है कि वह चुने हुए पंचायत प्रतिनिधि को आदेश जारी करे। मलबा हटाने का काम ग्राम पंचायत अपने स्तर से कर रही है।
- नवीन पांडे, ग्राम प्रधान ब्यूरा खाम।