हल्द्वानी/रामनगर। सलाखों के पीछे कैद जंगल के शिकारी तनाव के शिकार होते जा रहे हैं। रेस्क्यू सेंटरों मेंं क्षमता से अधिक बाघ और तेंदुओं की मौजूदगी ने न केवल उनके स्वाभाविक विचरण को बाधित किया है बल्कि उनमेंं बेचैनी, आपसी संघर्ष और मानसिक दबाव की स्थिति भी बढ़ा दी है। इंसानों से टकराव के बाद जंगल से रेस्क्यू सेंटर लाए गए बाघ और तेंदुए अब यहां बाड़ों मेंं जगह की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे मेंं रेस्क्यू सेंटर उनके लिए कैदखाना बनता जा रहा है।
रेस्क्यू सेंटर मेंं बढ़ती वन्य जीवों की भीड़ का असर केवल वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि बाड़ों मेंं कैद बाघ और तेंदुओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित स्थान मेंं अधिक संख्या मेंं वन्यजीवों के रहने से उनमेंं तनाव, आपसी संघर्ष और बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जंगल मेंं बाघ सामान्यतः 25 से 60 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र मेंं अकेले विचरण करता है जबकि रेस्क्यू सेंटर मेंं सीमित बाड़ों मेंं कई वन्यजीवों को साथ रखना पड़ रहा है। ऐसे मेंं पर्याप्त जगह न मिलने के कारण ये जानवर लंबे समय तक एक ही दिशा मेंं चक्कर लगाते रहते हैं, जिसे तनाव का प्रमुख लक्षण माना जाता है।
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दो रेस्क्यू सेंटरों का हाल
रानीबाग : रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर मेंं तेंदुओं के लिए बने बाड़े की क्षमता छह की है जबकि वर्तमान मेंं यहां 16 तेंदुए रखे गए हैं। इसी तरह बाघों के बाड़े की क्षमता तीन है लेकिन यहां पांच टाइगर कैद हैं।
रामनगर : कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर मेंं मेंं 15 बाघ और 15 तेंदुए के बाड़े हैं जबकि यहां 16 बाघ और 17 तेंदुए रखे गए हैं। क्षमता से अधिक वन्यजीव होने के कारण एक बाड़े मेंं दो बाघ और दो तेंदुओं के बाड़ों मेंं दो-दो तेंदुए रखे गए हैं।
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वन्यजीवों को विचरण के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है और उन्हें बारी-बारी से बाड़े मेंं भेजा जाता है। नए मास्टर प्लान के तहत बाघ और तेंदुओं के लिए 16-16 बाड़े बनाए जाएंगे। - साकेत बडोला, निदेशक-सीटीआर
मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने के बाद इस दौरान पिंजरे में कैद हुए या फिर ट्रेंकुलाइज किए गए बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू सेंटर भेजा गया। इससे रेस्क्यू सेंटर मेंं क्षमता से अधिक बाघ और तेंदुए हो गए हैं। स्थानाभाव की समस्या को देखते हुए रेस्क्यू सेंटर मेंं मौजूद बाघ और तेंदुओं को अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है।
- आकाश गंगवार प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल
रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर मेंं बाड़ों के विस्तार का प्रस्ताव भेजा गया है। धनराशि मिलने पर कार्यदायी संस्था लोनिवि की ओर से यहां बाड़ों का विस्तार प्रस्तावित है। - नितिन पंत रेंज अधिकारी