कुविवि में हिमालय की जैव विविधता विषय में आयोजित व्याख्यान में पद्मश्री अनूप साह का स्वागत करते
नैनीताल। 12 वर्ष में खिलने वाला कंडाली फूल (जोंटिला) अब वर्ष 2027 में खिलेगा जो कि जैव विविधता के चक्र को दर्शाता है। यह बात कुमाऊं विवि में आयोजित हिमालय की जैव विविधता विषय पर आयोजित व्याख्यान में पद्मश्री अनूप साह ने कहीं। उन्होंने प्रकृति संरक्षण और प्रकृति फोटोग्राफी के लिए भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
शनिवार को कुमाऊं विवि विजिटिंग प्रोफेसर निदेशालय और एलुमनी सेल की ओर से आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता पद्मश्री अनूप साह रहे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हिमालयी क्षेत्र 320 किलोमीटर हैं जिसमें नंदा देवी पर्वत, कामत सहित 200 पर्वत हैं।
उत्तराखंड में 790 चिड़िया, 124 मछलियां, 69 रेप्टाइल्स मिलती है। 4000 पौधों की प्रजाति में से एक तिहाई मेडिसिनल, 161 रेयर और 30 फीसदी एनडेमिक है। उन्होंने बायोडायवर्सिटी का अर्थ बताते हुए नैनीताल की वनस्पतियों और जीवों की विविधता पर चर्चा की।
इससे पूर्व प्रो. ललित तिवारी ने भी विचार रखे। इस मौके पर प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. लता पांडे, प्रो. अनिल बिष्ट, प्रो. नीलू लोधियाल, डॉ. पैनी जोशी, डॉ. मनोज आर्य आदि मौजूद रहे।