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जोहार महोत्सवः आज एमबी में दिखेगा सार संसार, एक मुनस्यार

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हल्द्वानी में आयोजित होने वाले जोहार महोत्सव को लेकर पत्रकार वार्ता करते जोहार सांस्कृतिक एवं व
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हल्द्वानी। शौका समाज के विशिष्ट पहनावा, खानपान, गायन, वादन के अलावा शौका समाज के प्रमुख व्यंजन और तीज त्योहार शनिवार को एमबी इंटर कॉलेज परिसर में जीवंत हो उठेंगे। जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी की ओर से 29 और 30 अक्तूबर को एमबी इंटर कॉलेज परिसर में ‘सार संसार, एक मुनस्यार’ के दीदार आम लोगों को हो सकेंगे।
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जोहार जनमिलन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत में सोसायटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह पांगती ने कहा कि दो दिवसीय जोहार महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को सुबह 11 बजे मेयर डॉ. जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला करेंगे। कुमाऊं और गढ़वाल के कलाकार दो दिनी महोत्सव में की शान बढ़ाएंगे। उद्घाटन से पूर्व जोहार जनमिलन केंद्र से पारंपरिक वेशभूषा में रं और शौका समाज की झांकी निकाली जाएगी। 30 अक्तूबर को ईष्ट देवी नंदा का डोला निकाला जाएगा। दिन में क्षेत्र के विकास गोष्ठी, पेंटिंग, ऐपण, कुमाऊंनी बोली में निबंध, भाषण प्रतियोगिता होगी। इसके अलावा मेले में शौका व्यंजन, कुटीर उद्योग, जड़ी बूटी प्रदर्शनी, शौका व्यंजनों के स्टॉल, लगाए जाएंगे।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जोहार मुनस्यारी के सभी संगठनों का सहयोग लिया गया है। महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस मौके पर संरक्षक गजेंद्र सिंह पांगती, देवेंद्र सिंह धर्मशक्तू, सचिव धीरेंद्र सिंह पांगती, कोषाध्यक्ष धाम सिंह मर्तोलिया, सांस्कृतिक सचिव नवीन टोलिया, सुमित मर्तोलिया आदि मौजूद रहे।
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छिनकेप पांगती पर आधारित नाटक होगा प्रमुख आकर्षण
सांस्कृतिक सचिव नवीन टोलिया ने बताया कि इस बार जोहार महोत्सव में गोरखा राज के दौरान प्रमुख बुद्धिजीवी रहे छिनकेप पांगती पर आधारित नाटक दिखाया जाएगा। यह नाटक महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
450 परिवार सामूहिक रूप से करते हैं आयोजन महोत्सव का आयोजन
हल्द्वानी। वर्ष 2010 से जोहार घाटी मुनस्यारी (पिथौरागढ़) के करीब 450 परिवार हल्द्वानी में जोहार महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। अपनी भाषा, संस्कृति, बोली को बचाने के लिए हर वर्ष यह मेला लगता है। इसमें जोहार घाटी की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी के सांस्कृतिक सचिव नवीन टोलिया ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य अपनी संस्कृति को संरक्षित करना और उसका प्रचार-प्रसार करना है। घागरा कामला वहां का मुख्य पहनावा है। व्यंजन में कुकला, मडुवे की रोटी, तिमूर की चटनी का खास प्रचलन है। मेला व्यवसायियों के लिए आर्थिकी का भी जरिया बन रहा है। संवाद
महोत्सव में यह कलाकार देंगे प्रस्तुति
सिने कलाकार हेमंत पांडे, जागर गायिका पद्मश्री बसंती देवी, कैलाश कुमार, नीरज चुफाल, कमलजीत ढकरिया, प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, आरजे काव्या, प्रह्लाद मेहरा आदि।
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