होटल, रिजॉर्ट की जरूरत को ध्यान में रखते हुए रामनगर के युवक ने अपने ही गांव में स्वरोजगार करने की ठानी। एरोमैटिक पौधों से एसेंशियल ऑयल निकालकर विभिन्न प्रकार के परफ्यूम तैयार कर बाजार में उतारे। अब रामनगर के सौ से अधिक हाेटल, रिजॉर्ट में इनके बनाए परफ्यूम की अच्छी मांग है।
दिल्ली के पांच सितारा होटल की नौकरी छोड़कर जीवन सिंह करायत ने अपने गांव ढेला में ही स्वरोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। जीवन बताते हैं कि जब वह दिल्ली के होटल में काम करते थे, तब उन्हें होटल इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले 1800 से अधिक उत्पादों की जानकारी हुई। इनमें परफ्यूम भी था जो होटलों के कमरों सहित अन्य स्थानों पर इस्तेमाल होता है।
रामनगर और आसपास क्षेत्र में 250 से अधिक होटल व रिजॉर्ट हैं। जब 2017 में यह स्वरोजगार शुरू किया था, तब उन्हें पता था कि यह आसान नहीं है। धीरे-धीरे होटल, रिजॉर्ट के कारोबारियों को हमारे बनाए गए परफ्यूम पसंद आने लगे। बताया कि वर्तमान में उनके पास सौ से अधिक होटल, रिजॉर्ट के ऑर्डर रहते हैं। संवाद
एरोमैटिक पौधों से बनाते है एसेंशियल ऑयल
जीवन सिंह ने बताया कि परफ्यूम बनाने के लिए एसेंशियल ऑयल की आवश्यकता होती है। लेमनग्रास, सिट्रोनेला, युकेलिप्टस, मेन्थॉल, वेटिवर खस, करी पत्ता, स्वीटक्लुमस, तेजपात आदि एरोमैटिक पौधों से एसेंशियल ऑयल बनाया जाता है। सभी प्रकार के एसेंशियल ऑयल के मिश्रण से विभिन्न प्रकार के परफ्यूम तैयार किए जाते हैं। जीवन सिंह ने बताया कि इस काम करने से पहले केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान अनुसंधान केंद्र, पंतनगर से प्रशिक्षण लिया।
गांव की 12 महिलाओं को दिया रोजगार
ढेला गांव में 120 बीघा जमीन पर प्लांट लगाया है। यहां पर काम करने के लिए गांव की 10 से 12 महिलाओं को रोजगार दिया है। इसके अलावा चार से पांच पुरुषों को रखा गया है, जो एरोमैटिक पौधों को बॉयलर में डालकर तेल निकालते है। एरोमैटिक पौधों को जीवन सिंह अपने ही खेतों में उगाते हैं। छोटे स्तर से शुरू किए इस प्रयास को अब बड़ा नाम मिलने लगा है। इस प्लांट में छह तरह के एरोमैटिक ऑयल के साथ साथ साबुन और जेल बनाए जा रहे हैं, जिनकी आपूर्ति 100 से ज्यादा होटल में हो रही है।