हल्द्वानी। गौलापार में प्रस्तावित आईएसबीटी सियासी उठापटक में उलझ कर रह गया है। प्रस्तावित आईएसबीटी स्थल से नरकंकाल मिलने के बाद जांच के नाम पर बंद हुआ काम नहीं शुरू हो सका। डीपीआर पास हुए बिना ही आईएसबीटी का नक्शा बना लिया गया था।
कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहीं डॉ. इंदिरा हृदयेश के ड्रीम प्रोजेक्टों में आईएसबीटी भी शामिल है। कांग्रेस सरकार के समय आईएसबीटी को स्वीकृति मिली थी। 76 करोड़ रुपये से लगभग दस एकड़ में गौलापार में आईएसबीटी का निर्माण प्रस्तावित है। आईएसबीटी में नरकंकाल निकलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई और जांच के नाम पर काम भी ठप हो गया।
कुछ महीनों तक जांच के नाम पर ही मामले को लटकाए रखा गया। आईएसबीटी पर ऐसा राजनीतिक रंग चढ़ा कि काम नहीं शुरू हो सका है। आईएसबीटी बनने का सबसे बड़ा फायदा लोगों को मिलता। शहर से रोडवेज बस स्टेशन हटने के बाद जाम के झाम से निजात मिलती। रोडवेज में मल्टीप्लेक्स, पार्किंग बनने से काफी हद तक पार्किंग की समस्या कम हो जाती। सूत्रों की मानें तो आईएसबीटी की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) नहीं बनी है जबकि नक्शे को मंजूरी मिल गई थी।
आईएसबीटी के मामले में कैबिनेट में पूर्व सरकार ने फैसला किया था। ये मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी है। इस मामले में बहुत जल्द फैसला होगा। 15 दिनों के भीतर आईएसबीटी के मामले में निर्णय ले लिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो मामले को कैबिनेट में भी लाया जा सकता है।
- यशपाल आर्य
परिवहन मंत्री
आईएसबीटी का निर्माण हर हाल में होगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी बात हो चुकी है। आईएसबीटी का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा।
- डॉ. इंदिरा हृदयेश
नेता प्रतिपक्ष