नैनीताल हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग में वरिष्ठता सूची के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सहायक आबकारी आयुक्त पद पर की जा रही पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगाते हुए सरकार सहित अन्य को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता सुजात हसन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 29 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 9 मई 2024 व 14 नवंबर 2024 की अनंतिम वरिष्ठता सूची पर उनकी आपत्ति खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने आबकारी निरीक्षक संवर्ग की अंतिम वरिष्ठता सूची में क्रम संख्या 109 पर अपनी स्थिति को निरस्त कर संख्या 71ए (72) पर रखे जाने की मांग की है। याचिका में कहा कि याचिकाकर्ता मूलत: उर्दू अनुवादक (लिपिकीय संवर्ग) के पद पर नियुक्त थे और 27 सितंबर 2014 को आबकारी निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए थे। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति डीपीसी पहली बार 9 जून 2014 को बैठी थी, किंतु प्रशासनिक कारणों से स्थगित होकर अंततः 26 सितंबर 2014 को सम्पन्न हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड सरकारी सेवक वरिष्ठता नियमावली, 2002 के नियम 8(3) में हुए संशोधन के अनुसार, यदि पदोन्नत कर्मी एवं सीधी भर्ती के कर्मी एक ही चयन वर्ष में नियुक्त/पदोन्नत होते हैं तो रोटा-कोटा नियम लागू होगा। चूंकि याचिकाकर्ता का चयन वर्ष 2013-14 सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मियों नियुक्ति तिथि 12 सितंबर 2013 के समान है, अतः रोटा-कोटा नियम के तहत पदोन्नत कर्मी को सीधी भर्ती वालों पर वरीयता मिलनी चाहिए। वहीं राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सीधी भर्ती संयुक्त अधीनस्थ सेवा चयन परीक्षा-2010 के माध्यम से हुई थी, जिसकी संशोधित अधियाचना 26 मार्च 2012, चयन वर्ष 2011-12 को भेजी गई थी और सीधी भर्ती के कर्मी 12 सितंबर 2013 को नियुक्त हुए। इसके विपरीत याचिकाकर्ता की अधियाचना 5 फरवरी 2014 चयन वर्ष 2013-14 को भेजी गई थी और डीपीसी की संस्तुति 26 सितंबर 2014 को हुई, जो राज्य सरकार के अनुसार चयन वर्ष 2014-15 में आता है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 नवंबर 2026 की तिथि नियत करते हुए स्पष्ट किया है कि मामले के निस्तारण तक प्रतिवादी सहायक आबकारी आयुक्त पद पर कोई पदोन्नति नहीं करेंगे।