नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून स्थित महादेवी कन्या पाठशाला में हुए 45 लाख रुपये के गबन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को 25 मार्च तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में महादेवी कन्या पाठशाला में प्रधानाचार्य और तत्कालीन सचिव द्वारा किए गए घोटाले से संबंधित जांच रिपोर्ट पेश की गई।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं तथा न्यायाधीश आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई। मामले के अनुसार महादेवी कन्या पाठशाला की पूर्व छात्रा सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि एमकेपी कॉलेज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जारी 45 लाख रुपये का गबन किया है। याचिका में कहा गया कि यूजीसी की ओर से 45 लाख रुपये एमकेपी की छात्राओं की शिक्षा में सहूलियत के लिए जारी की गई थी। पूर्व में इस ग्रांट से कैंपस में वाईफाई इत्यादि लगा था, लेकिन 2012-2013 के दौरान इस धनराशि का इस्तेमाल एप्पल के महंगे उपकरण खरीदने में किया गया।
याचिका में कहा गया कि संबंधित उपकरण 2019 में किए गए निरीक्षण के दौरान पाए ही नहीं गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि एमकेपी ने टेंडर नहीं निकाला, केवल कोटेशन के आधार पर पैसों की बंदरबांट की गई। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार के ऑडिट में भी इसे गलत माना गया। इस प्रकरण पर 2016-2017 में एफआईआर भी दर्ज की गई, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनवरी 2019 में शासन के स्थलीय निरीक्षण के दौरान भी एमकेपी में 768000 की सामग्री पाई ही नहीं गई। इस वजह से यूजीसी ने एमकेपी को अगली पंचवर्षीय योजना में कोई धनराशि नहीं दी, जिससे यहां शिक्षा के स्तर में गिरावट आ रही है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को 25 मार्च तक उसके द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है।