खुपार्ताल बाईपास के पास स्थित पांच एमएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट टैंक के सोमवार को ढह जाने के मामले में जिला प्रशासन और पेयजल से जुड़े अधिकारी खासे गंभीर हो गए हैं। मंगलवार को जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया।
बता दें कि एनएलसीपी योजना के तहत 2009-10 में नगर से सटे रूसी गांव के पास और खुर्पाताल बाईपास में सौलिया और जमीरा गांव के ऊपर 5-5 एमएलडी क्षमता के दो ट्रीटमेंट टैंक बनाए गए। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे बाईपास के पास का सीवर ट्रीटमेंट टैंक ढह गया। संबंधित प्रकरण के समाचार पत्र की सुर्खियां बनने के बाद जिला प्रशासन सकते में आ गया।
जल निगम के एसई जीसी पांडे, सीई एसके अग्रवाल, ईई रकमपाल सिंह, एई पीसी जोशी, जल संस्थान के ईई जगदीप चौधरी, एई एसके गुप्ता ने मंगलवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से भी बातचीत की। एई पीसी जोशी ने बताया कि संबंधित रिसाव और टैंक में लगातार आ रहे सीवर को पुराने गधेरे की ओर डायवर्ट कर दिया गया है, ताकि ग्रामीणों के पेयजल स्रोत प्रदूषित होने से बच सकें।
रुड़की की टीम करेगी जांच
एसई जीसी पांडे ने बताया कि रुड़की के विशेषज्ञों के माध्यम से कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। इसके बाद टैंक निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर उसे जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा की टीम संभवत: बुधवार को यहां पहुंच सकती है।
टैंक ढहने से भूकंप का संबंध नहीं
खुर्पाताल बाईपास मार्ग में स्थित सीवर टैंक कार्य की गुणवत्ता में कमी के चलते ढहा है। इसका पिछले दिनों आए भूकंप से कोई संबंध नहीं है। ऐसा कहना किसी की लापरवाहियों पर पर्दा डालने के समान है। बता दें कि जिलाधिकारी दीपक रावत के निर्देश के बाद झील विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीष कुमार ने भी मंगलवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सीवर टैंकों के चैंबरों में भारी दबाव के चलते टैंक के चैंबरों की दीवारें ढही हैं। जल्द ही टैंक का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
- सीवर टैंक के ढहने की उच्च स्तरीय जांच हो। सभी ग्रामीणों को साथ लेकर इसके लिए जिला प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा।
- हिमांशु पांडे, ग्राम प्रधान, बेलुवाखान।