नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में जंगल में कब्जे को लेकर एक गैर सरकारी संगठन ने केस किया है। मामले में एनजीटी ने शासन समेत संबंधित जगह के डीएफओ को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में आठ मई को सुनवाई होनी है।
जंगल में अंधेरगर्दी हो रही है। ताकत, रसूख और कथित तौर पर नेताओं के संरक्षण के दम पर रामनगर जैसे इलाके में दबंग जंगल में अवैध सड़क बना रहे हैं, जिससे खुलेआम रेता, बजरी निकाला जा रहा है। ऐसे कई जगह मामले हैं, जहां पर वन भूमि पर कब्जा किया गया है। इसको लेकर सेंटर फार इनवायरमेंटल लिटिगेशन नामक संस्था ने एनजीटी में केस किया है।
इसमें नैनीताल, राजाजी नेशनल पार्क, बागेश्वर और रामनगर में जंगल की जमीन पर कब्जे की बात कही। मामले में एनजीटी ने संबंधित जगहों के निदेशक, डीएफओ को शपथ पत्र देने को कहा है, जिसको लेकर वनाधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। वहीं, गौला में भी खनन को लेकर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले दिनेश पांडे ने भी एनजीटी में केस किया हुआ है। ऐसे में अवैध खनन, अराजकता को लेकर एनजीटी कोई कड़ा फैसला ले सकती है।
जांच कराने का करेंगे अनुरोध : बलूनी
हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी उत्तराखंड की राज्य सरकार के संरक्षण में अवैध और अवैज्ञानिक खनन हो रहा है। सरकार के उच्च पदस्थ पदों पर आसीन लोग अवैध खनन से जुड़े हैं। अवैध खनन हो रहा है, उससे वैध खनन पर प्रभाव पड़ सकता है। भारत सरकार के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से वैज्ञानिक अध्ययन और जांच दोनों कराने का अनुरोध किया जाएगा।