पिछले साल केंद्र में सरकार बदलने से लोगों को अच्छे दिन की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। जो खाद्य वस्तुएं पिछले साल सस्ती थीं, उनकी कीमतों में एक साल के भीतर इतना इजाफा हुआ है कि इसने किचन का बजट ही बिगड़ दिया है। दोपहर के भोजन में सबसे ज्यादा पसंद की जानें वाली अरहर की दाल की कीमतें आसमान पहुंच गई हैं। मसाले और मेवा की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। तेजी से बढ़ती इस महंगाई से कम आय वाले लोग खासे परेशान हैं, मगर सभी राजनैतिक पार्टियां मौन हैं।
महंगाई का कहर
खाद्य वस्तुओं का नाम वर्ष 2014 में कीमत 2015 में कीमत
-दाल अरहर 70 रुपये प्रति किलो 120 रुपये किलो
-दाल उड़द 75 से 85 रुपये किलो 110 रुपये
-मूंग की दाल 80 से 90 रुपये 110 रुपये
- मूंग धुली दाल 100 से 110 125 रुपये
- चना दाल 45 से 50 60 रुपये
- दाल मलका 70 से 75 रुपये 90 रुपये
- काली मसूर 70 रुपये 85 रुपये
- उड़द साबुत 80 रुपये 105 रुपये
- राजमा 85 रुपये 100 रुपये
- चना काबली 50 से 65 रुपये 55 से 80 रुपये
- चना काला 40 से 45 रुपये 55 रुपये
- आटा 20 से 21 रुपये स्थिर
- चावल सरबती 40 से 45 रुपये 32 से 34 रुपये
- चावल बासमती 100 रुपये 70 रुपये
- चावल मोटा 24 रुपये 22 रुपये
- तेल सरसों 80 रुपये 90 रुपये
- रिफाइंड आयल 70 से 90 रुपये 80 रुपये
- वनस्पति घी 70 से 80 रुपये 75 रुपये
- देसी घी 350 रुपये 325 रुपये
- चीनी 35 से 36 रुपये 28 से 30 रुपये
- चाय पत्ती ब्रांडेड 280 से 290 रुपये 340 रुपये
- नमक 15 रुपये की थैली 17 से 18 रुपये
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मसाले
वर्ष 2014 में 2015 में
- जीरा 140 से 150 रुपये किलो 210 रुपये किलो
- साबुत धनिया 130 रुपये 160 रुपये
- हल्दी साबुत 70 रुपये 90 रुपये
- मिर्च साबुत 130 रुपये 160 रुपये
- काली मिर्च 600 रुपये 750 रुपये
- लाल इलायची 1200 रुपये 2000 रुपये
- सफेद इलायची 1300 रुपये 1400 रुपये
- लौंग 700 रुपये 900 रुपये
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मेवा
वर्ष 2014 में 2015 में
- बादाम गिरि 750 रुपये किलो 850 रुपये किलो
- काजू 550 रुपये किलो 650 रुपये किलो
- किशमिश 200 रुपये 300 रुपये
- मखाने 450 रुपये 500 रुपये
- गोला 170 रुपये 200 से 225 रुपये
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आम वस्तुओं के मूल्य एक साल के अंदर काफी बढ़े हैं। पहले लोग महीने भर का राशन लेकर जाते थे, अब केवल जरूरत भर के लिए सामान खरीदते हैं। साल भर में बढ़ी कीमतों को देखकर महंगाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। - सुधीर लाला, किराना दुकानदार, पटेल चौक हल्द्वानी।
महंगाई पर महिलाओं से बातचीत
-महंगाई की मार ने घर का बजट ही बिगाड़ दिया है। मोदी सरकार आने पर उम्मीद थी कि महंगाई कुछ कम होगी मगर कुछ नहीं हुआ। - खष्टी देवी
-साल भर में आम वस्तुओं पर महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ी है। मोदी सरकार का महंगाई कम करने का वादा भी गलत साबित हुआ। - शोभा रानी
-आम वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से घर का खर्च बहुत बढ़ गया है। केंद्र में सरकार बदलने के बाद महंगाई पर अंकुश नहीं लगा। - प्रेमा
- मोदी सरकार का एक वर्ष पूर्ण हो रहा है, लेकिन सरकार जनता से किया कोई वायदा पूरा नहीं सकी। महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। - प्रमिला वर्मा