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देशी-विदेशी बर्ड वॉचरों को लुभाता है यहां के पक्षियों का कलरव, नैनीताल के पास सातताल, चांफी और पंगूट में है पक्षियों का अनोखा संसार

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ब्राउन वुड आउल - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। नैनीताल जिले को यूं तो झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है, लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि नैनीताल के गांवों में पक्षियों का अनोखा संसार है। देश के साथ ही विदेशी बर्ड वॉचर भी यहां चिड़ियों के बारे में जानने, समझने और उन्हें कैमरे में कैद करने के लिए पहुंचते हैं। पक्षियों का यह अद्भुत संसार कहीं दूर नहीं बल्कि नैनीताल के पास स्थित सातताल, पंगूट और चांफी के जंगल में है, जहां सालभर चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है।
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चिड़ियों का यही कलरव देशी-विदेशी बर्ड वॉचरों को आकर्षित करता है। चार हजार से अधिक बर्ड वॉचर हर साल इन जगहों पर पहुंचते हैं पक्षी विशेषज्ञ बताते हैं कि सातताल बर्ड वॉचरों को इसलिए पसंद आता है क्योंकि सड़क पर खड़े होकर भी नीचे की ओर घने जंगल को देखा जा सकता है। सातताल, पंगूट और चांफी में भारत के अलावा कतर, ओमान, भूटान, यूएई, सऊदी अरब, ब्रिटेन, इजराइल आदि देशों से भी बर्ड वॉचर पहुंचते हैं। बर्ड वॉचिंग ने यहां लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इन क्षेत्रों में स्थित होटल और रिजॉर्ट अपने यहां आने वाले सैलानियों को पैकेज में बर्ड वॉचिंग कराते हैं।
बर्ड वॉचिंग के लिए यह समय होता है अनुकूल
पक्षी विशेषज्ञ आशीष बिष्ट बताते हैं कि बर्ड वॉचिंग के लिए अप्रैल से जून और अक्तूबर से जनवरी तक का समय बेहद अनुकूल रहता है। तराई में गर्मी या ठंड बढ़ने पर उससे बचने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पक्षी सातताल से लेकर पंगूट तक पहुंचते हैं। बता दें कि सातताल, पंगूट और चांफी के जंगल में उतीस, पदम, तिमिल और बांज समेत कई प्रजातियों के पेड़, बैरी और किलमोड़ा जैसी कई झाड़ियां मौजूद हैं, जिन्हें चिड़ियाएं पसंद करती हैं।
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यह हैं प्रमुख पक्षी विशेषज्ञ
नैनीताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रमुख पक्षी विशेषज्ञों के रूप में राजेश पवार, रोहित नयाल, प्रभु हजारा, विक्रम भंडारी, नीर बनकोटी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह न केवल पक्षियों के बारे में गहन जानकारी रखते हैं बल्कि बर्ड वॉचरों के टूर भी संचालित करते हैं।
कहां कौन सी चिड़ियाएं आती हैं नजर
-सातताल : नैनीताल से 23 किलोमीटर दूर स्थित सातताल में अलग अलग झीलें और उससे लगा घना जंगल है। यहां यूरेशियन वुड काक, रूफस ब्लिड नेलटावा, रूफर्स पाटराइज, ग्रीन मैगपाई, लांगलेट ब्लाडबिल, स्कैलीथ्रस, ब्राउन फिश आउल, ब्राउन वुड आउल, खलीज फिजेंट, रेड जंगल फाउल, एशियन पैराडाइज फ्लाइकैचर बर्ड दिखती हैं।
-चांफी : नैनीताल से लगभग 24 किलोमीटर दूर हल्द्वानी-लोहाघाट मार्ग में स्थित है चांफी। यहां मुख्य रूप से ब्राउन डिप्पर, लिटिल फाक्टेल, स्पाटेड फाक्टेल, टोनी फिश आउल प्रजाति की चिड़ियों को देखा जा सकता है।
-पंगूट : नैनीताल से लगभग 20 किलोमीटर दूर पंगूट गांव है, यहां के जंगल में मुख्य रूप से चीर फीजेंट और कोकलाज के दीदार बर्ड वॉचरों को होते हैं।
नैनीताल में पंगूट, सातताल और चांफी के जंगल बर्ड वॉचरों के पसंदीदा स्थान हैं। यहां गर्मी और जाड़ों में अलग अलग प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। रंग-बिरंगी चिड़ियाओं के संसार को कैमरे में कैद करने का अनुभव ही अलग होता है। -अनूप साह, पद्मश्री, फोटोग्राफर और बर्ड वॉचर
नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्ड वॉचिंग की अपार संभावनाएं हैं। सरकार को बर्ड वॉचिंग को पर्यटन से जोड़ना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक बर्ड वॉचर यहां आएं और लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिले। -डॉ. आशीष बिष्ट, प्रमुख बर्ड टूरिज्म विशेषज्ञ भीमताल
सातताल और आसपास के क्षेत्रों में गर्मियों और जाड़ों में कई प्रजातियों की चिड़ियाएं आती हैं। उच्च हिमालयी और गर्म देशों से आने वाली चिड़ियाओं को देखने के लिए यहां देशी ही नहीं बल्कि विदेशी बर्ड वॉचर भी आते हैं। बर्ड वॉचिंग से पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ाया जा सकता है। -प्रभु हजारा, प्रमुख पक्षी विशेषज्ञ सातताल नैनीताल
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